सुन्दरकाण्ड

अध्याय 5: रामायुध से अंकित भवन

5 श्लोक · 5 में से 60

इस अध्याय में क्या होता है

रामायुध से अंकित भवन

लंकिनी कहती है, कोसलपुर के राजा को हृदय में रखकर नगर में जाओ और सब काम करो। जिस पर श्रीराम कृपा करके देख लें, उसके लिए विष अमृत बनता है, शत्रु मित्र बनता है, समुद्र गाय के खुर जितना रह जाता है, आग शीतल हो जाती है और सुमेरु धूल जैसा हल्का। भगवान का स्मरण कर हनुमान बहुत छोटा रूप लेकर पैठते हैं। वे एक एक महल ढूँढ़ते हैं और जहाँ तहाँ अनगिनत योद्धा देखते हैं। रावण के अद्भुत महल में रावण सोया है, पर वैदेही वहाँ नहीं हैं। फिर एक सुन्दर भवन दिखता है जिसमें भगवान का अलग मन्दिर बना है। वह श्रीराम के धनुष बाण के चिह्नों से अंकित है और वहाँ तुलसी के नये पौधे हैं। यह देखकर कपिराज हर्षित होते हैं।

5.1

प्रबिसि नगर कीजे सब काजा । हृदयँ राखि कोसलपुर-राजा ॥
गरल सुधा रिपु करइ मिताई । गो-पद सिन्धु अनल सितलाई ॥

prabisi nagara kīje saba kājā | hṛdayam̐ rākhi kosalapura-rājā ||
garala sudhā ripu karai mitāī | go-pada sindhu anala sitalāī ||

5.2

गरुअ सुमेरु रेनू सम ताही । राम कृपा करि चितवा जाही ॥
अति लघु रूप धरेउ हनुमाना । पैठा नगर सुमिरि भगवाना ॥

garua sumeru renū sama tāhī | rāma kṛpā kari citavā jāhī ||
ati laghu rūpa dhareu hanumānā | paiṭhā nagara sumiri bhagavānā ||

5.3

मन्दिर मन्दिर प्रति करि सोधा । देखे जहँ तहँ अगनित जोधा ॥
गयउ दसानन मन्दिर माहीं । अति बिचित्र कहि जात सो नाहीं ॥

mandira mandira prati kari sodhā | dekhe jaham̐ taham̐ aganita jodhā ||
gayau dasānana mandira māhīṃ | ati bicitra kahi jāta so nāhīṃ ||

5.4

सयन किये देखा कपि तेही । मन्दिर महँ न दीख वैदेही ॥
भवन एक पुनि दीख सुहावा । हरि मन्दिर तहँ भिन्न बनावा ॥

sayana kiye dekhā kapi tehī | mandira maham̐ na dīkha vaidehī ||
bhavana eka puni dīkha suhāvā | hari mandira taham̐ bhinna banāvā ||

दो॰ 5दोहा

रामायुध अङ्कित गृह, सोभा बरनि न जाइ ।
नव तुलसिका बृंद तहँ, देखि हरष कपिराइ ॥

rāmāyudha aṅkita gṛha, sobhā barani na jāi |
nava tulasikā bṛṃda taham̐, dekhi haraṣa kapirāi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0