सुन्दरकाण्ड

अध्याय 46: श्रीराम विभीषण को हृदय से लगाते हैं

5 श्लोक · 46 में से 60

इस अध्याय में क्या होता है

श्रीराम विभीषण को हृदय से लगाते हैं

विभीषण दण्डवत करते हैं और प्रभु हर्ष से तुरन्त उठकर विशाल भुजाओं से उन्हें हृदय से लगा लेते हैं। छोटे भाई सहित मिलकर पास बिठाते हैं और पूछते हैं, लंकेश, परिवार सहित कुशल हो? तुम बुरी जगह रहते हो, दिन रात दुष्टों की मण्डली में, सखा, तुम्हारा धर्म कैसे निभता है? मैं तुम्हारी रीति जानता हूँ, तुम नीति में निपुण हो और अनीति तुम्हें नहीं भाती। तात, नरक में रहना भला, पर विधाता दुष्ट का संग न दे। विभीषण कहते हैं, रघुराई, आपके चरण देखकर अब कुशल हूँ, आपने अपना जन जानकर दया की। जब तक जीव शोक के घर काम को छोड़कर राम को नहीं भजता, उसे सपने में भी कुशल और विश्राम नहीं।

46.1

अस कहि करत दंडवत देखा । तुरत उठे प्रभु हरष बिसेखा ॥
दीन बचन सुनि प्रभु मन भावा । भुज बिसाल गहि हृदयँ लगावा ॥

asa kahi karata daṃḍavata dekhā | turata uṭhe prabhu haraṣa bisekhā ||
dīna bacana suni prabhu mana bhāvā | bhuja bisāla gahi hṛdayam̐ lagāvā ||

46.2

अनुज सहित मिलि ढिग बैठारी । बोले बचन भगत भय-हारी ॥
कहु लंकेस सहित परिवारा । कुसल कुठाहर बास तुम्हारा ॥

anuja sahita mili ḍhiga baiṭhārī | bole bacana bhagata bhaya-hārī ||
kahu laṃkesa sahita parivārā | kusala kuṭhāhara bāsa tumhārā ||

46.3

खल-मंडलीं बसहु दिन राती । सखा धरम निबहइ केहि भाँती ॥
मैं जानउँ तुम्हारि सब रीती । अति नय निपुन न भाव अनीती ॥

khala-maṃḍalīṃ basahu dina rātī | sakhā dharama nibahai kehi bhām̐tī ||
maiṃ jānaum̐ tumhāri saba rītī | ati naya nipuna na bhāva anītī ||

46.4

बरु भल बास नरक कर ताता । दुष्ट सङ्ग जनि देइ बिधाता ॥
अब पद देखि कुसल रघुराया । जौँ तुम्ह कीन्हि जानि जन दाया ॥

baru bhala bāsa naraka kara tātā | duṣṭa saṅga jani dei bidhātā ||
aba pada dekhi kusala raghurāyā | jaum̐ tumha kīnhi jāni jana dāyā ||

दो॰ 46दोहा

तबलगि कुसल न जीव कहुँ, सपनेहुँ मन बिश्राम ।
जब लगि भजत न राम कहँ, सोक-धाम तजि काम ॥

tabalagi kusala na jīva kahum̐, sapanehum̐ mana biśrāma |
jaba lagi bhajata na rāma kaham̐, soka-dhāma taji kāma ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0