सुन्दरकाण्ड

अध्याय 43: सुग्रीव का सन्देह, श्रीराम का प्रण

6 श्लोक · 43 में से 60

इस अध्याय में क्या होता है

सुग्रीव का सन्देह, श्रीराम का प्रण

विभीषण शीघ्र समुद्र के इस पार आ जाते हैं। वानर उन्हें शत्रु का कोई विशेष दूत समझकर रोकते हैं और सुग्रीव से कहते हैं। सुग्रीव कहते हैं, रघुराई, रावण का भाई आपसे मिलने आया है। प्रभु पूछते हैं, सखा, तुम्हारा क्या विचार है? कपीश कहते हैं, राक्षसों की माया जानी नहीं जाती, ये इच्छा से रूप बदलते हैं। यह दुष्ट हमारा भेद लेने आया है, इसे बाँधकर रखिए। श्रीराम कहते हैं, सखा, तुमने नीति ठीक विचारी, पर मेरा प्रण शरणागत का भय हरना है। यह सुनकर हनुमान हर्षित होते हैं। दोहा कहता है, जो अपना अहित सोचकर शरणागत को त्याग देते हैं, वे नीच और पापी हैं, उन्हें देखने में भी हानि है।

43.1

एहि बिधि करत सप्रेम बिचारा । आयउ सपदि सिन्धु एहिं पारा ॥
कपिन्ह बिभीषन आवत देखा । जाना कोउ रिपु दूत बिसेखा ॥

ehi bidhi karata saprema bicārā | āyau sapadi sindhu ehiṃ pārā ||
kapinha bibhīṣana āvata dekhā | jānā kou ripu dūta bisekhā ||

43.2

ताहि राखि कपीस पहिँ आये । समाचार सब ताहि सुनाये ॥
कह सुग्रीव सुनहु रघुराई । आवा मिलन दसानन भाई ॥

tāhi rākhi kapīsa pahim̐ āye | samācāra saba tāhi sunāye ||
kaha sugrīva sunahu raghurāī | āvā milana dasānana bhāī ||

43.3

कह प्रभु सखा बूझिऐ काहा । कहइ कपीस सुनहु नरनाहा ॥
जानि न जाइ निसाचर माया । काम-रूप केहि कारन आया ॥

kaha prabhu sakhā būjhiai kāhā | kahai kapīsa sunahu naranāhā ||
jāni na jāi nisācara māyā | kāma-rūpa kehi kārana āyā ||

43.4

भेद हमार लेन सठ आवा । राखिअ बांधि मोहि अस भावा ॥
सखा नीति तुम्ह नीकि बिचारी । मम पन सरनागत-भय-हारी ॥

bheda hamāra lena saṭha āvā | rākhia bāṃdhi mohi asa bhāvā ||
sakhā nīti tumha nīki bicārī | mama pana saranāgata-bhaya-hārī ||

43.5

सुनि प्रभु बचन हरष हनुमाना । सरनागत बच्छल भगवाना ॥

suni prabhu bacana haraṣa hanumānā | saranāgata bacchala bhagavānā ||

दो॰ 43दोहा

सरनागत कहँ जे तजहिँ, निज अनहित अनुमानि ।
ते नर पावँर पापमय, तिन्हहिं बिलोकत हानि ॥

saranāgata kaham̐ je tajahim̐, nija anahita anumāni |
te nara pāvam̐ra pāpamaya, tinhahiṃ bilokata hāni ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0