सुन्दरकाण्ड

अध्याय 33: सब आपका प्रताप है, रघुराई

6 श्लोक · 33 में से 60

इस अध्याय में क्या होता है

सब आपका प्रताप है, रघुराई

प्रभु बार बार हनुमान को उठाना चाहते हैं, पर प्रेम में मग्न कपि को उठना नहीं भाता। प्रभु का करकमल कपि के सिर पर है, यह दशा याद करके गौरीश स्वयं मग्न हो जाते हैं, फिर मन सँभालकर कथा कहते हैं। प्रभु कपि को उठाकर हृदय से लगाते हैं और पास बिठाते हैं। पूछते हैं, रावण की बाँकी लंका तुमने कैसे जलाई? प्रभु को प्रसन्न जानकर हनुमान अभिमान रहित होकर कहते हैं, बन्दर का बड़ा पुरुषार्थ यही है कि डाल से डाल पर कूद जाए। मैंने समुद्र लाँघा, सोने का नगर जलाया, राक्षस मारे, वन उजाड़ा, यह सब आपका प्रताप है रघुराई, मेरी प्रभुता नहीं। जिस पर आप अनुकूल हों उसके लिए कुछ कठिन नहीं, आपके प्रभाव से रुई भी बड़वानल को जला सकती है।

33.1

बार बार प्रभु चहहिँ उठावा । प्रेम मगन तेहि उठब न भावा ॥
प्रभु कर पङ्कज कपि कें सीसा । सुमिरि सो दसा मगन गौरीसा ॥

bāra bāra prabhu cahahim̐ uṭhāvā | prema magana tehi uṭhaba na bhāvā ||
prabhu kara paṅkaja kapi keṃ sīsā | sumiri so dasā magana gaurīsā ||

33.2

सावधान मन करि पुनि सङ्कर । लागे कहन कथा अति सुन्दर ॥
कपि उठाइ प्रभु हृदयँ लगावा । कर गहि परम निकट बैठावा ॥

sāvadhāna mana kari puni saṅkara | lāge kahana kathā ati sundara ||
kapi uṭhāi prabhu hṛdayam̐ lagāvā | kara gahi parama nikaṭa baiṭhāvā ||

33.3

कहु कपि रावन पालित लङ्का । केहि बिधि दहेउ दुर्ग अति बङ्का ॥
प्रभु प्रसन्न जाना हनुमाना । बोला बचन बिगत अभिमाना ॥

kahu kapi rāvana pālita laṅkā | kehi bidhi daheu durga ati baṅkā ||
prabhu prasanna jānā hanumānā | bolā bacana bigata abhimānā ||

33.4

साखामृग कै बड़ि मनुसाई । साखा तेँ साखा पर जाई ॥
नाँघि सिन्धु हाटकपुर जारा । निसिचर-गन बिधि विपिन उजारा ॥

sākhāmṛga kai bar̤i manusāī | sākhā tem̐ sākhā para jāī ||
nām̐ghi sindhu hāṭakapura jārā | nisicara-gana bidhi vipina ujārā ||

33.5

सो सब तव प्रताप रघुराई । नाथ न कछू मोरि प्रभुताई ॥

so saba tava pratāpa raghurāī | nātha na kachū mori prabhutāī ||

दो॰ 33दोहा

ता कहुँ प्रभु कछु अगम नहिँ, जा पर तुम्ह अनुकूल ।
तव प्रभावँ बड़वानलहिं, जारि सकइ खलु तूल ॥

tā kahum̐ prabhu kachu agama nahim̐, jā para tumha anukūla |
tava prabhāvam̐ bar̤avānalahiṃ, jāri sakai khalu tūla ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0