सुन्दरकाण्ड

अध्याय 27: चूड़ामणि और सीता का सन्देश

5 श्लोक · 27 में से 60

इस अध्याय में क्या होता है

चूड़ामणि और सीता का सन्देश

माता, मुझे कोई चिह्न दीजिए, जैसे रघुनायक ने मुझे दिया था। सीता चूड़ामणि उतारकर देती हैं और हनुमान हर्ष से लेते हैं। वे कहती हैं, प्रभु को मेरा प्रणाम कहना। वे पूर्णकाम हैं, पर दीनदयालु का अपना विरद याद करके मेरा भारी संकट हरें। उन्हें इन्द्र के पुत्र की कथा और अपने बाण का प्रताप याद दिलाना। महीने भर में नाथ न आए तो मुझे जीवित नहीं पाएँगे। तुम्हें देखकर छाती ठण्डी हुई थी, अब तुम भी जाने की कहते हो, फिर वही दिन और वही रातें। कपि बहुत प्रकार धीरज देकर चरणों में सिर नवाते हैं और श्रीराम के पास चल देते हैं।

27.1

मातु मोहि दीजै कछु चीन्हा । जैसें रघुनायक मोहि दीन्हा ॥
चूड़ामनि उतारि तब दयऊ । हरष समेत पवन-सुत लयऊ ॥

mātu mohi dījai kachu cīnhā | jaiseṃ raghunāyaka mohi dīnhā ||
cūr̤āmani utāri taba dayaū | haraṣa sameta pavana-suta layaū ||

27.2

कहेउ तात अस मोर प्रनामा । सब प्रकार प्रभु पूरनकामा ॥
दीन दयाल बिरिदु सँभारी । हरहु नाथ मम सङ्कट भारी ॥

kaheu tāta asa mora pranāmā | saba prakāra prabhu pūranakāmā ||
dīna dayāla biridu sam̐bhārī | harahu nātha mama saṅkaṭa bhārī ||

27.3

तात सक्र-सुत कथा सुनाएहु । बान प्रताप प्रभुहि समुझाएहु ॥
मास दिवस महँ नाथ न आवा । तौ पुनि मोहि जियत नहिं पावा ॥

tāta sakra-suta kathā sunāehu | bāna pratāpa prabhuhi samujhāehu ||
māsa divasa maham̐ nātha na āvā | tau puni mohi jiyata nahiṃ pāvā ||

27.4

कहु कपि केहि बिधि राखौं प्राना । तुम्हहूँ तात कहत अब जाना ॥
तोहि देखि सीतलि भइ छाती । पुनि मो कहँ सो दिन सोइ राती ॥

kahu kapi kehi bidhi rākhauṃ prānā | tumhahūm̐ tāta kahata aba jānā ||
tohi dekhi sītali bhai chātī | puni mo kaham̐ so dina soi rātī ||

दो॰ 27दोहा

जनक-सुतहि समुझाइ करि, बहु बिधि धीरज दीन्ह ।
चरन-कमल सिर नाइ कपि, गवन राम पहिँ कीन्ह ॥

janaka-sutahi samujhāi kari, bahu bidhi dhīraja dīnha |
carana-kamala sira nāi kapi, gavana rāma pahim̐ kīnha ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0