सुन्दरकाण्ड

अध्याय 28: समुद्र पार वापसी और मधुबन

5 श्लोक · 28 में से 60

इस अध्याय में क्या होता है

समुद्र पार वापसी और मधुबन

चलते समय हनुमान ऐसी भारी गर्जना करते हैं कि राक्षसियों के गर्भ गिर जाते हैं। समुद्र लाँघकर वे इस पार आते हैं और वानरों को किलकारी सुनाते हैं। उन्हें देखकर वानरों को मानो नया जन्म मिलता है, कपि का मुख प्रसन्न है, शरीर में तेज है, रामचन्द्र का काम हो गया है। सब उनसे ऐसे मिलते हैं जैसे तड़पती मछली को जल मिला हो, और नया वृत्तान्त कहते सुनते रघुनायक की ओर चलते हैं। मधुबन में अंगद की सम्मति से वे मधु और फल खाते हैं, रोकने वाले रखवालों को घूँसे मारकर भगा देते हैं। रखवाले सुग्रीव से पुकारते हैं कि युवराज ने बन उजाड़ दिया, और सुग्रीव हर्षित होते हैं कि प्रभु का काम हो गया।

28.1

चलत महाधुनि गर्जेसि भारी । गर्भ स्त्रवहिं सुनि निसिचर-नारी ॥
नाँघि सिन्धु एहि पारहि आवा । सबद किलकिला कपिन्ह सुनावा ॥

calata mahādhuni garjesi bhārī | garbha stravahiṃ suni nisicara-nārī ||
nām̐ghi sindhu ehi pārahi āvā | sabada kilakilā kapinha sunāvā ||

28.2

हरषे सब बिलोकि हनुमाना । नूतन जनम कपिन्ह तब जाना ॥
मुख प्रसन्न तन तेज बिराजा । कीन्हेसि रामचन्द्र कर काजा ॥

haraṣe saba biloki hanumānā | nūtana janama kapinha taba jānā ||
mukha prasanna tana teja birājā | kīnhesi rāmacandra kara kājā ||

28.3

मिले सकल अति भये सुखारी । तलफत मीन पाव जनु बारी ॥
चले हरषि रघुनायक पासा । पूछत कहत नवल इतिहासा ॥

mile sakala ati bhaye sukhārī | talaphata mīna pāva janu bārī ||
cale haraṣi raghunāyaka pāsā | pūchata kahata navala itihāsā ||

28.4

तब मधुबन भीतर सब आये । अङ्गद सम्मत मधु-फल खाये ॥
रखवारे जब बरजन लागे । मुष्टि प्रहार हनत सब भागे ॥

taba madhubana bhītara saba āye | aṅgada sammata madhu-phala khāye ||
rakhavāre jaba barajana lāge | muṣṭi prahāra hanata saba bhāge ||

दो॰ 28दोहा

जाइ पुकारे ते सब, बन उजार जुबराज ।
सुनि सुग्रीव हरष कपि, करि आये प्रभु काज ॥

jāi pukāre te saba, bana ujāra jubarāja |
suni sugrīva haraṣa kapi, kari āye prabhu kāja ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0