सीता तैं मम कृत अपमाना । कटिहउँ तव सिर कठिन कृपाना ॥
नाहिँ त सपदि मानु मम बानी । सुमुखि होत न त जीवन हानी ॥
sītā taiṃ mama kṛta apamānā | kaṭihaum̐ tava sira kaṭhina kṛpānā ||
nāhim̐ ta sapadi mānu mama bānī | sumukhi hota na ta jīvana hānī ||
6 श्लोक · 10 में से 60
रावण कहता है, तूने मेरा अपमान किया, तुरन्त बात मान, नहीं तो यह कृपाण तेरा सिर काट देगी। सीता कहती हैं, मेरे कण्ठ पर या तो श्याम कमल की माला जैसी प्रभु की भुजाएँ होंगी या तेरी भयानक तलवार, यही मेरा प्रण है। फिर वे चन्द्रहास से ही विनती करती हैं कि अपनी तीखी शीतल धार से विरह की आग का ताप हर ले। रावण फिर मारने दौड़ता है, तो मय की पुत्री मन्दोदरी नीति समझाकर रोकती है। वह राक्षसियों को आज्ञा देता है कि सीता को हर तरह डराओ, एक मास में न माने तो मैं मार डालूँगा। वह महल चला जाता है और भयानक रूप धरी राक्षसियाँ सीता को डराने लगती हैं।
सीता तैं मम कृत अपमाना । कटिहउँ तव सिर कठिन कृपाना ॥
नाहिँ त सपदि मानु मम बानी । सुमुखि होत न त जीवन हानी ॥
sītā taiṃ mama kṛta apamānā | kaṭihaum̐ tava sira kaṭhina kṛpānā ||
nāhim̐ ta sapadi mānu mama bānī | sumukhi hota na ta jīvana hānī ||
स्याम-सरोज-दाम सम सुन्दर । प्रभु भुज करि कर सम दसकन्धर ॥
सो भुज कंठ कि तव अति घोरा । सुनु सठ अस प्रमान पन मोरा ॥
syāma-saroja-dāma sama sundara | prabhu bhuja kari kara sama dasakandhara ||
so bhuja kaṃṭha ki tava ati ghorā | sunu saṭha asa pramāna pana morā ||
चन्द्रहास हर मम परितापं । रघुपति-बिरह-अनल संजातं ॥
सीतल निसित बहसि बर धारा । कह सीता हरु मम दुख भारा ॥
candrahāsa hara mama paritāpaṃ | raghupati-biraha-anala saṃjātaṃ ||
sītala nisita bahasi bara dhārā | kaha sītā haru mama dukha bhārā ||
सुनत बचन पुनि मारन धावा । मय-तनया कहि नीति बुझावा ॥
कहेसि सकल निसिचरिन्ह बोलाई । सीतहि बहु बिधि त्रासह जाई ॥
sunata bacana puni mārana dhāvā | maya-tanayā kahi nīti bujhāvā ||
kahesi sakala nisicarinha bolāī | sītahi bahu bidhi trāsaha jāī ||
मास-दिवस महँ कहा न माना । तौ मैं मारबि काढ़ि कृपाना ॥
māsa-divasa maham̐ kahā na mānā | tau maiṃ mārabi kār̤hi kṛpānā ||
भवन गयउ दसकन्धर, इहाँ पिसाचिनि बृन्द ।
सीतहि त्रास देखावहिँ, धरहिँ रूप बहु मन्द ॥
bhavana gayau dasakandhara, ihām̐ pisācini bṛnda |
sītahi trāsa dekhāvahim̐, dharahim̐ rūpa bahu manda ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0