सुन्दरकाण्ड

अध्याय 9: रावण का प्रलोभन, सीता का उत्तर

6 श्लोक · 9 में से 60

इस अध्याय में क्या होता है

रावण का प्रलोभन, सीता का उत्तर

पत्तों में छिपे हनुमान सोचते हैं कि क्या करूँ। तभी सजी हुई रानियों के साथ रावण आता है और साम, दाम, भय, भेद से सीता को समझाता है। कहता है, मैं प्रण करता हूँ कि मन्दोदरी आदि सब रानियों को तुम्हारी दासी बना दूँगा, बस एक बार मेरी ओर देख लो। वैदेही बीच में तिनके की ओट करके अवधपति का स्मरण करती हैं और कहती हैं, दशमुख, क्या कमलिनी जुगनू के प्रकाश से खिलती है? दुष्ट, तुझे रघुवीर के बाणों की सुध नहीं। तू सूने में मुझे हर लाया, अधम, तुझे लाज नहीं आती। अपने को जुगनू और राम को सूर्य सुनकर रावण खिसियाकर तलवार खींच लेता है।

9.1

तरु पल्लव महँ रहा लुकाई । करइ विचार करउँ का भाई ॥
तेहि अवसर रावन तहँ आवा । सङ्ग नारि बहु किये बनावा ॥

taru pallava maham̐ rahā lukāī | karai vicāra karaum̐ kā bhāī ||
tehi avasara rāvana taham̐ āvā | saṅga nāri bahu kiye banāvā ||

9.2

बहु बिधि खल सीतहि समुझावा । साम दाम भय भेद देखावा ॥
कह रावन सुनु सुमुखि सयानी । मन्दोदरी आदि सब रानी ॥

bahu bidhi khala sītahi samujhāvā | sāma dāma bhaya bheda dekhāvā ||
kaha rāvana sunu sumukhi sayānī | mandodarī ādi saba rānī ||

9.3

तव अनुचरीं करउँ पन मोरा । एक बार बिलोकु मम ओरा ॥
तृन धरि ओट कहति बैदेही । सुमिरि अवधपति परम-सनेही ॥

tava anucarīṃ karaum̐ pana morā | eka bāra biloku mama orā ||
tṛna dhari oṭa kahati baidehī | sumiri avadhapati parama-sanehī ||

9.4

सुनु दसमुख खद्योत प्रकासा । कबहुँ कि नलिनी करइ बिकासा ॥
अस मन समुझु कहति जानकी । खल सुधि नहिँ रघुबीर बान की ॥

sunu dasamukha khadyota prakāsā | kabahum̐ ki nalinī karai bikāsā ||
asa mana samujhu kahati jānakī | khala sudhi nahim̐ raghubīra bāna kī ||

9.5

सठ सूने हरि आनेहि मोही । अधम निलज्ज लाज नहिँ तोही ॥

saṭha sūne hari ānehi mohī | adhama nilajja lāja nahim̐ tohī ||

दो॰ 9दोहा

आपुहि सुनि खद्योत सम, रामहिँ भानु समान ।
परुष बचन सुनि काढि असि, बोला अति खिसिआन ॥

āpuhi suni khadyota sama, rāmahim̐ bhānu samāna |
paruṣa bacana suni kāḍhi asi, bolā ati khisiāna ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0