लंकाकाण्ड

अध्याय 98: वानरों और जाम्बवान का प्रहार, संध्या तक युद्ध

10 श्लोक · 98 में से 121

इस अध्याय में क्या होता है

वानरों और जाम्बवान का प्रहार, संध्या तक युद्ध

रावण के सिर और भुजाएँ बढ़ते देख भालू-वानर क्रोध से टूट पड़ते हैं। अंगद, हनुमान, सुग्रीव आदि वृक्षों और पर्वतों से प्रहार करते हैं; रावण वही पर्वत और वृक्ष उन पर फेंकता है। नल-नील उसके सिरों पर चढ़कर नखों से मस्तक फाड़ते हैं। वह उन्हें पकड़ने को हाथ फैलाता है, पर वे हाथों पर ऐसे फिरते हैं जैसे कमल-वन में दो भौंरे। दसों धनुषों से वह वानरों को घायल करता है, हनुमान आदि को मूर्च्छित कर देता है। तब जाम्बवान भालुओं के साथ आते हैं; उनकी लात से रावण रथ से गिर पड़ता है। फिर जाम्बवान प्रभु के पास लौटते हैं। रात जानकर सारथी रावण को ले जाता है। मूर्च्छा टूटने पर भालू और वानर प्रभु के पास आ जुटते हैं, और डरे निशाचर रावण को घेरे रहते हैं।

98.1

सिर भुज बाढ़ि देखि रिपु केरी । भालु कपिन्ह रिस भई घनेरी ॥
परत न मूढ़ कटेउ भुज सीसा । धाये कोपि भालु भट कीसा ॥

sira bhuja bār̤hi dekhi ripu kerī | bhālu kapinha risa bhaī ghanerī ||
parata na mūr̤ha kaṭeu bhuja sīsā | dhāye kopi bhālu bhaṭa kīsā ||

98.2

बालि-तनय मारुति नल नीला । बानरराज दुबिद बलसीला ॥
बिटप महीधर करहिं प्रहारा । सोइ गिरि तरु गहि कपिन्ह से मारा ॥

bāli-tanaya māruti nala nīlā | bānararāja dubida balasīlā ||
biṭapa mahīdhara karahiṃ prahārā | soi giri taru gahi kapinha se mārā ||

98.3

एक नखन्हि रिपु-बपुष-बिदारी । भअगि चलहिँ एक लातन्ह मारी ॥
तब नल नील सिरन्हि चढ़ि गयऊ । नखन्हि लिलार बिदारत भयऊ ॥

eka nakhanhi ripu-bapuṣa-bidārī | bhaagi calahim̐ eka lātanha mārī ||
taba nala nīla siranhi car̤hi gayaū | nakhanhi lilāra bidārata bhayaū ||

98.4

रुधिर देखि बिषाद उर भारी । तिन्हहिं धरन कहाँ भुजा पसारी ॥
गहे न जाहिँ करन्हि पर फिरहीं । जन जुग मधुप कमल बन चरहीं ॥

rudhira dekhi biṣāda ura bhārī | tinhahiṃ dharana kahām̐ bhujā pasārī ||
gahe na jāhim̐ karanhi para phirahīṃ | jana juga madhupa kamala bana carahīṃ ||

98.5

कोपि कूदि होउ धरेसि बहोरी । महि पटकत भजे भुजा मरोरी ॥
पुनि सकोप दस धनु कर लीन्हे । सरन्हि मारि घायल कपि कीन्हे ॥

kopi kūdi hou dharesi bahorī | mahi paṭakata bhaje bhujā marorī ||
puni sakopa dasa dhanu kara līnhe | saranhi māri ghāyala kapi kīnhe ||

98.6

हनुमदादि मुरुछित करि बन्दर । पाइ प्रदोष हरष दसकन्धर ॥
मुरछित देखि सकल कपि बीरा । जामवन्त धायउ रनधीरा ॥

hanumadādi muruchita kari bandara | pāi pradoṣa haraṣa dasakandhara ||
murachita dekhi sakala kapi bīrā | jāmavanta dhāyau ranadhīrā ||

98.7

सङ्ग भालु भूधर तरु धारी । मारन लगे पचारी पचारी ॥
भयउ क्रुद्ध रावन बलवाना । गहि पर महि पटकइ भट नाना ॥

saṅga bhālu bhūdhara taru dhārī | mārana lage pacārī pacārī ||
bhayau kruddha rāvana balavānā | gahi para mahi paṭakai bhaṭa nānā ||

98.8

देखि भालुपति निज दल घाता । कोपि माझ उर मारेसि लाता ॥

dekhi bhālupati nija dala ghātā | kopi mājha ura māresi lātā ||

98.छं॰ 1छन्द

उर लात घात प्रचंड लागत, बिकल रथ तैं सहि परा ।
गहि भालु बीसहुँ कर मनहुँ कमलन्हि बसे निसि मधुकरा ॥
मुरुछित बिलोकि बहोरि पद हति, भालुपति प्रभु पहिँ गयो ।
निसि जानि स्यन्दन घालि तेहि तब, सूत जतन करत भयो ॥

ura lāta ghāta pracaṃḍa lāgata, bikala ratha taiṃ sahi parā |
gahi bhālu bīsahum̐ kara manahum̐ kamalanhi base nisi madhukarā ||
muruchita biloki bahori pada hati, bhālupati prabhu pahim̐ gayo |
nisi jāni syandana ghāli tehi taba, sūta jatana karata bhayo ||

दो॰ 98दोहा

मुरछा बिगत भालु कपि, सब आये प्रभु पास ।
निसिचर सकल रावनहि, घेरि रहे अति-त्रास ॥

murachā bigata bhālu kapi, saba āye prabhu pāsa |
nisicara sakala rāvanahi, gheri rahe ati-trāsa ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0