लंकाकाण्ड

अध्याय 97: अंगद का रावण को पटकना, बढ़ते सिर

6 श्लोक · 97 में से 121

इस अध्याय में क्या होता है

अंगद का रावण को पटकना, बढ़ते सिर

प्रभु क्षण भर में सारी माया काट देते हैं, जैसे सूर्य उगते ही अँधेरा फट जाता है। एक ही रावण देखकर देवता फूल बरसाते हैं। रघुनाथ भुजा उठाकर वानरों को लौटाते हैं। देवताओं को स्तुति करते देख रावण क्रोध में सोचता है कि इनके हिसाब से मैं अब अकेला रह गया, और आकाश में उनकी ओर दौड़ता है। देवता हाहाकार करके भागते हैं। तब अंगद कूदकर उसके पैर पकड़ते हैं, धरती पर पटककर लात मारते हैं और प्रभु के पास लौट जाते हैं। रावण सँभलकर घोर गर्जना करता है, दसों धनुषों पर बाण चढ़ाकर बरसाता है और योद्धाओं को घायल करता है। तब रघुपति उसके सिर, भुजाएँ, बाण और धनुष काटते हैं, पर वे फिर बहुत बढ़ जाते हैं, जैसे तीर्थ में किए पाप बढ़ते हैं।

97.1

प्रभु छन महुँ माया सब काटी । जिमि रबि उये जाहिँ तम फाटी ॥
रावनु एकु देखि सुर हरषे । फिरे सुमन बहु प्रभु पर बरषे ॥

prabhu chana mahum̐ māyā saba kāṭī | jimi rabi uye jāhim̐ tama phāṭī ||
rāvanu eku dekhi sura haraṣe | phire sumana bahu prabhu para baraṣe ||

97.2

भुज उठाइ रघुपति कपि फेरे । फिरे एक एकन्ह तब टेरे ॥
प्रभु बल पाइ भालु कपि धाये । तरल तमकि सञ्जुग-महि आये ॥

bhuja uṭhāi raghupati kapi phere | phire eka ekanha taba ṭere ||
prabhu bala pāi bhālu kapi dhāye | tarala tamaki sañjuga-mahi āye ||

97.3

अस्तुति करत देवतन्हि देखें । भयउँ एक में इन्ह के लेखें ॥
सठहु सदा तुम्ह मोर मरायल । अस कहि कोपि गगन पथ धायल ॥

astuti karata devatanhi dekheṃ | bhayaum̐ eka meṃ inha ke lekheṃ ||
saṭhahu sadā tumha mora marāyala | asa kahi kopi gagana patha dhāyala ||

97.4

हाहाकार करत सुर भागे । खलहु जाहु कहँ मोरें आगे ॥
देखि बिकल सुर अङ्गद धायो । कूदि चरन गहि भूमि गिरायो ॥

hāhākāra karata sura bhāge | khalahu jāhu kaham̐ moreṃ āge ||
dekhi bikala sura aṅgada dhāyo | kūdi carana gahi bhūmi girāyo ||

97.छं॰ 1छन्द

गहि भूमि पार्यो लात मार्, बालि-सुत प्रभु पहिँ गयो ।
सँभारि उठि दसकंठ घोर कठोर रव गर्जत भयो ॥
करि दाप चाप चढ़ाई दस सन्धानि तर बहु बरई ।
किए सकल भट घायल भयाकुल, देखि निज बल हरषई ॥

gahi bhūmi pāryo lāta mār, bāli-suta prabhu pahim̐ gayo |
sam̐bhāri uṭhi dasakaṃṭha ghora kaṭhora rava garjata bhayo ||
kari dāpa cāpa car̤hāī dasa sandhāni tara bahu baraī |
kie sakala bhaṭa ghāyala bhayākula, dekhi nija bala haraṣaī ||

दो॰ 97दोहा

तब रघुपति रावन के सीस भुजा सर चाप ।
काटे बहुत बढ़े पुनि, जिमि तीरथ कर पाप ॥

taba raghupati rāvana ke sīsa bhujā sara cāpa |
kāṭe bahuta bar̤he puni, jimi tīratha kara pāpa ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0