लंकाकाण्ड

अध्याय 89: इन्द्र का रथ और रावण की माया का नाश

6 श्लोक · 89 में से 121

इस अध्याय में क्या होता है

इन्द्र का रथ और रावण की माया का नाश

प्रभु को पैदल लड़ते देखकर देवताओं के मन में बड़ा क्षोभ होता है। इन्द्र तुरन्त अपना रथ भेजते हैं और मातलि हर्ष के साथ उसे ले आते हैं। तेज से भरे उस अनुपम दिव्य रथ पर कोसलपति प्रसन्न होकर चढ़ते हैं। रथ पर रघुनाथ को देखकर वानर नए बल से दौड़ते हैं, और उनकी मार न सह पाकर रावण माया फैलाता है। वह माया केवल रघुवीर से बची; लक्ष्मण और वानरों ने उसे सच मान लिया। उन्हें निशाचरों की सेना में बहुत-से राम और लक्ष्मण दिखते हैं। प्रभु हँसकर बाण चढ़ाते हैं और पल भर में माया हर लेते हैं; सारी वानर-सेना हर्षित होती है। फिर श्रीराम सबको देखकर गम्भीर वाणी में कहते हैं: वीरो, तुम बहुत थक गए हो, अब द्वन्द्व-युद्ध देखो।

89.1

देवन्ह प्रभुहि पयादें देखा । उपजा उर अति छोभ बिसेखा ॥
सुरपति निज रथ तुरत पठावा । हरष सहित मातलि लेइ आवा ॥

devanha prabhuhi payādeṃ dekhā | upajā ura ati chobha bisekhā ||
surapati nija ratha turata paṭhāvā | haraṣa sahita mātali lei āvā ||

89.2

तेज पुञ्ज रथ दिव्य अनूपा । हरषि चढ़े कोसलपुर भूपा ॥
चञ्चल तुरग मनोहर चारी । अजर अमर मन सम गतिकारी ॥

teja puñja ratha divya anūpā | haraṣi car̤he kosalapura bhūpā ||
cañcala turaga manohara cārī | ajara amara mana sama gatikārī ||

89.3

रथारूढ़ रघुनाथहि देखी । धाये कपि बल पाइ बिसेखी ॥
सही न जाइ कपिन्ह के मारी । तर रावन माया बिस्तारी ॥

rathārūr̤ha raghunāthahi dekhī | dhāye kapi bala pāi bisekhī ||
sahī na jāi kapinha ke mārī | tara rāvana māyā bistārī ||

89.4

सो माया रघुबीरहि बाँची । लछिमन कपिन्ह सो मानी साँची ॥
देखी कपिन्ह निसाचर अनी । अनुज सहित बहु कोसलधनी ॥

so māyā raghubīrahi bām̐cī | lachimana kapinha so mānī sām̐cī ||
dekhī kapinha nisācara anī | anuja sahita bahu kosaladhanī ||

89.छं॰ 1छन्द

बहु राम लछिमन देखि मर्कट, भालु मन अति अपडरे ।
जनु चित्र लिखित समेत लछिमन, जहँ सो तहँ चितवहिँ खरे ॥
निज सेन चकित बिलोकि हँसि सर, चाप सजि कोसल धनी ।
माया हरी हरि निमिष सह हरषी सकल मरकट-अनी ॥

bahu rāma lachimana dekhi markaṭa, bhālu mana ati apaḍare |
janu citra likhita sameta lachimana, jaham̐ so taham̐ citavahim̐ khare ||
nija sena cakita biloki ham̐si sara, cāpa saji kosala dhanī |
māyā harī hari nimiṣa saha haraṣī sakala marakaṭa-anī ||

दो॰ 89दोहा

बहुरि राम सब तन चितइ, बोले बचन गंभीर ।
द्वन्द-जुद्ध देखहु सकल, श्रमित भये अति बीर ॥

bahuri rāma saba tana citai, bole bacana gaṃbhīra |
dvanda-juddha dekhahu sakala, śramita bhaye ati bīra ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0