लंकाकाण्ड

अध्याय 77: देवताओं का हर्ष, लंका में मेघनाद का शोक

5 श्लोक · 77 में से 121

इस अध्याय में क्या होता है

देवताओं का हर्ष, लंका में मेघनाद का शोक

हनुमान बिना प्रयास मेघनाद का शरीर उठाकर लंका के द्वार पर रख आते हैं। उसकी मृत्यु सुनकर देवता और गन्धर्व विमानों में आकाश में आते हैं, फूल बरसाते हैं, नगाड़े बजाते हैं और श्री रघुवीर का निर्मल यश गाते हैं: हे अनन्त, हे जगत के आधार, आपकी जय हो; आपने सब देवताओं का उद्धार किया। स्तुति करके देवता और सिद्ध चले जाते हैं, और लक्ष्मण कृपासिन्धु के पास लौट आते हैं। पुत्र-वध सुनते ही रावण मूर्च्छित होकर धरती पर गिर पड़ता है। मन्दोदरी छाती पीट-पीटकर अनेक प्रकार से विलाप करती है। नगर के सब लोग व्याकुल हैं और सब रावण को नीच कहते हैं। तब रावण सब स्त्रियों को तरह-तरह से समझाता है: हृदय में विचार करके देखो, यह सारा जगत नाशवान है।

77.1

बिनु-प्रयास हनुमान उठायो । लङ्का-द्वार राखि पुनि आयो ॥
तासु मरन सुनि सुर गन्धर्बा । चढ़ि बिमान आये नभ सर्बा ॥

binu-prayāsa hanumāna uṭhāyo | laṅkā-dvāra rākhi puni āyo ||
tāsu marana suni sura gandharbā | car̤hi bimāna āye nabha sarbā ||

77.2

बरषि सुमन दुंदुभीं बजावहिँ । श्रीरघुबीर-बिमल-जस गावहिँ ॥
जय अनन्त जय जगदाधारा । तुम्ह प्रभु सब देवन्ह निस्तारा ॥

baraṣi sumana duṃdubhīṃ bajāvahim̐ | śrīraghubīra-bimala-jasa gāvahim̐ ||
jaya ananta jaya jagadādhārā | tumha prabhu saba devanha nistārā ||

77.3

अस्तुति करि सुर सिद्ध सिधाये । लछिमन कृपासिन्धु पहिँ आये ॥
सुत बध सुना दसानन जबहीं । मुरछित भयउ परेउ महि तबहीं ॥

astuti kari sura siddha sidhāye | lachimana kṛpāsindhu pahim̐ āye ||
suta badha sunā dasānana jabahīṃ | murachita bhayau pareu mahi tabahīṃ ||

77.4

मन्दोदरी रुदन कर भारी । उर ताड़न बहु भाँति पुकारी ॥
नगर लोग सब व्याकुल सेवा । सकल कहहिँ दसकन्धर पोचा ॥

mandodarī rudana kara bhārī | ura tār̤ana bahu bhām̐ti pukārī ||
nagara loga saba vyākula sevā | sakala kahahim̐ dasakandhara pocā ||

दो॰ 77दोहा

तब दसकंठ विविध विधि, समुझाईं सब नारि ।
नस्वर-रूप जगत सब, देखहु हृदयँ बिचारि ॥

taba dasakaṃṭha vividha vidhi, samujhāīṃ saba nāri |
nasvara-rūpa jagata saba, dekhahu hṛdayam̐ bicāri ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0