जाइ कपिन्ह सो देखा बैसा । आहुति देत रुधिर अस भैंसा ॥
कीन्ह कपिन्ह सब जग्य विधंसा । जब न उठइ तब करहिं प्रसंसा ॥
jāi kapinha so dekhā baisā | āhuti deta rudhira asa bhaiṃsā ||
kīnha kapinha saba jagya vidhaṃsā | jaba na uṭhai taba karahiṃ prasaṃsā ||
9 श्लोक · 76 में से 121
वानर जाकर देखते हैं कि मेघनाद बैठा रक्त और भैंसे की आहुति दे रहा है। वे यज्ञ नष्ट करते हैं, बाल पकड़कर लातें मारते हैं और भागते हैं। वह त्रिशूल लेकर पीछे दौड़ता है और लक्ष्मण के सामने आता है। वह हनुमान और अंगद को गिराकर लक्ष्मण पर शूल छोड़ता है, जिसे वे बाण से काट देते हैं। वज्र जैसे बाण देखकर वह अन्तर्धान हो जाता है और कभी प्रकट, कभी छिपकर लड़ता है। तब लक्ष्मण मन में ठानते हैं कि इस पापी को बहुत खेला लिया। कोसलपति का प्रताप स्मरण कर वे बाण छोड़ते हैं, जो उसकी छाती में लगता है। मरते समय वह सारा कपट छोड़कर कहता है: रामानुज कहाँ हैं, राम कहाँ हैं? अंगद और हनुमान कहते हैं: धन्य है तेरी माता।
जाइ कपिन्ह सो देखा बैसा । आहुति देत रुधिर अस भैंसा ॥
कीन्ह कपिन्ह सब जग्य विधंसा । जब न उठइ तब करहिं प्रसंसा ॥
jāi kapinha so dekhā baisā | āhuti deta rudhira asa bhaiṃsā ||
kīnha kapinha saba jagya vidhaṃsā | jaba na uṭhai taba karahiṃ prasaṃsā ||
तदपि न उठइ धरेन्हि कच जाई । लातन्हि हति हति चले पराई ॥
लेइ त्रिशूल धावा कपि भागे । आये जहँ रामानुज आगे ॥
tadapi na uṭhai dharenhi kaca jāī | lātanhi hati hati cale parāī ||
lei triśūla dhāvā kapi bhāge | āye jaham̐ rāmānuja āge ||
आवा परम क्रोध कर मारा । गर्ज घोर रव बारहिँ बारा ॥
कोपि मरुत-सुत अङ्गद धाये । हति त्रिसूल उर धरनि गिराये ॥
āvā parama krodha kara mārā | garja ghora rava bārahim̐ bārā ||
kopi maruta-suta aṅgada dhāye | hati trisūla ura dharani girāye ||
प्रभु कहँ छाँड़ेसि सूल प्रचंडा । सर हति कृत अनन्त जुग खंडा ॥
उठि बहोरि मारुति जुबराजा । हतहिँ कोपि तेहि घाउ न बाजा ॥
prabhu kaham̐ chām̐r̤esi sūla pracaṃḍā | sara hati kṛta ananta juga khaṃḍā ||
uṭhi bahori māruti jubarājā | hatahim̐ kopi tehi ghāu na bājā ||
फिरे बीर रिपु मरइ न मारा । तब धावा करि घोर चिकारा ॥
आवत देखि क्रुद्ध जनु काला । लछिमन छाड़े बिसिख कराला ॥
phire bīra ripu marai na mārā | taba dhāvā kari ghora cikārā ||
āvata dekhi kruddha janu kālā | lachimana chār̤e bisikha karālā ||
देखेसि आवत पबि सम बाना । तुरत भयउ खल अन्तरधाना ॥
बिबिध बेष धरि करइ लराई । कबहुँक प्रगट कबहुँ दुरि जाई ॥
dekhesi āvata pabi sama bānā | turata bhayau khala antaradhānā ||
bibidha beṣa dhari karai larāī | kabahum̐ka pragaṭa kabahum̐ duri jāī ||
देखि अजय रिपु डरपे कीसा । परम क्रुद्ध तब भयउ अहीसा ॥
लछिमन मन अस मन्त्र दृढ़ावा । एहि पापिहि मैं बहुत खेलावा ॥
dekhi ajaya ripu ḍarape kīsā | parama kruddha taba bhayau ahīsā ||
lachimana mana asa mantra dṛr̤hāvā | ehi pāpihi maiṃ bahuta khelāvā ||
सुमिरि कोसलाधीस प्रतापा । सर सन्धान कीन्ह करि दापा ॥
छाड़ा बान माँझ उर लागा । मरती बार कपट सब त्यागा ॥
sumiri kosalādhīsa pratāpā | sara sandhāna kīnha kari dāpā ||
chār̤ā bāna mām̐jha ura lāgā | maratī bāra kapaṭa saba tyāgā ||
रामानुज कहँ राम कहँ, अस कहि छाँडेसि प्रान ।
धन्य धन्य तव जननी, कह अङ्गद हनुमान ॥
rāmānuja kaham̐ rāma kaham̐, asa kahi chām̐ḍesi prāna |
dhanya dhanya tava jananī, kaha aṅgada hanumāna ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0