लंकाकाण्ड

अध्याय 74: गरुड़ का नागपाश काटना, जाम्बवान का प्रहार

7 श्लोक · 74 में से 121

इस अध्याय में क्या होता है

गरुड़ का नागपाश काटना, जाम्बवान का प्रहार

शिवजी कहते हैं कि श्रीराम के सगुण चरित तर्क से नहीं समझे जाते; इसलिए ज्ञानी तर्क छोड़कर उन्हें भजते हैं। मेघनाद फिर प्रकट होकर कटु वचन कहता है। जाम्बवान के ललकारने पर वह कहता है कि बूढ़ा जानकर तुझे छोड़ा था, और त्रिशूल चलाता है; जाम्बवान उसे हाथ में पकड़कर उसी से मेघनाद की छाती पर मारते हैं। वह गिर पड़ता है। जाम्बवान पैर पकड़कर उसे घुमाते और धरती पर पटकते हैं, पर वरदान के कारण वह मरता नहीं, तो उसे लंका पर फेंक देते हैं। उधर नारद गरुड़ को भेजते हैं; वे प्रभु के पास आकर सारे मायामय नाग खा जाते हैं। माया हटते ही वानर हर्षित होकर पीछा करते हैं और निशाचर भागकर किले पर चढ़ जाते हैं।

74.1

चरित राम के सगुन भवानी । तर्कि न जाहिँ बुद्धि बल बानी ॥
अस बिचारि जे तज्ञ बिरागी । रामहि भजहिँ तर्क सब त्यागी ॥

carita rāma ke saguna bhavānī | tarki na jāhim̐ buddhi bala bānī ||
asa bicāri je tajña birāgī | rāmahi bhajahim̐ tarka saba tyāgī ||

74.2

व्याकुल कटक कीन्ह घननादा । पुनि भा प्रगट कहइ दुर्बादा ॥
जामवन्त कह खल रह ठाढ़ा । सुनि करि ताहि क्रोध अति बाढ़ा ॥

vyākula kaṭaka kīnha ghananādā | puni bhā pragaṭa kahai durbādā ||
jāmavanta kaha khala raha ṭhār̤hā | suni kari tāhi krodha ati bār̤hā ||

74.3

बूढ़ जानि सठ छाँड़ेउँ तोही । लागेसि अधम पचारै मोही ॥
अस कहि तरल त्रिसूल चलायो । जामवन्त कर गहि सोइ धायो ॥

būr̤ha jāni saṭha chām̐r̤eum̐ tohī | lāgesi adhama pacārai mohī ||
asa kahi tarala trisūla calāyo | jāmavanta kara gahi soi dhāyo ||

74.4

मारिसि मेघनाद कै छाती । परा भूमि घुर्मित सुरघाती ॥
पुनि रिसान गहि चरन फिरायौ । महि पछारि निज बल देखरायो ॥

mārisi meghanāda kai chātī | parā bhūmi ghurmita suraghātī ||
puni risāna gahi carana phirāyau | mahi pachāri nija bala dekharāyo ||

74.5

बर प्रसाद सो मरइ न मारा । तब गहि पद लङ्का पर डारा ॥
इहाँ देवरिषि गरुड़ पठायो । राम समीप सपदि सो आयो ॥

bara prasāda so marai na mārā | taba gahi pada laṅkā para ḍārā ||
ihām̐ devariṣi garur̤a paṭhāyo | rāma samīpa sapadi so āyo ||

दो॰ 74 (क)दोहा

खगपति सब धरि खाये, माया-नाग-बरूथ ।
माया-बिगत भये सब, हरषे बानर जूथ ॥

khagapati saba dhari khāye, māyā-nāga-barūtha |
māyā-bigata bhaye saba, haraṣe bānara jūtha ||

दो॰ 74 (ख)दोहा

गहि गिरि पादप उपल नख, धाये कीस रिसाइ ।
चले तमीचर बिकलतर, गढ़ पर चढ़े पराइ ॥

gahi giri pādapa upala nakha, dhāye kīsa risāi |
cale tamīcara bikalatara, gar̤ha para car̤he parāi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0