लंकाकाण्ड

अध्याय 73: मेघनाद का नागपाश में प्रभु को बाँधना

8 श्लोक · 73 में से 121

इस अध्याय में क्या होता है

मेघनाद का नागपाश में प्रभु को बाँधना

आकाश से मेघनाद शक्ति, त्रिशूल, तलवार, फरसे, परिघ, पत्थर और बाण बरसाता है। पकड़ो, मारो का शोर सुनाई देता है, पर मारने वाला दिखता नहीं। माया से वह हर घाटी, रास्ते और गुफा पर बाणों का पिंजरा बना देता है। वह हनुमान, अंगद, लक्ष्मण, सुग्रीव और विभीषण को घायल करके श्रीराम से लड़ता है। उसके बाण नाग बन जाते हैं और खरारी नागपाश में बँध जाते हैं। पर वे सदा स्वतन्त्र, एक और निर्विकार हैं; नट की तरह लीला करते हैं। रण की शोभा के लिए बँधे, और देवता डर गए। शिवजी पूछते हैं: जिनका नाम जपकर मुनि भव-बन्धन काटते हैं, वे क्या बन्धन में आ सकते हैं?

73.1

सक्ति सूल तरवारि कृपाना । अस्त्र सस्त्र कुलिसायुध नाना ॥
डारह परसु परिघ पाषाना । लागेउ वृष्टि करइ बहु बाना ॥

sakti sūla taravāri kṛpānā | astra sastra kulisāyudha nānā ||
ḍāraha parasu parigha pāṣānā | lāgeu vṛṣṭi karai bahu bānā ||

73.2

दस दिसि रहे बान नभ छाई । मानहुँ मघा-मेघ झरि लाई ॥
धरु धरु मारु सुनिय धुनि काना । जो मारइ तेहि कोउ न जाना ॥

dasa disi rahe bāna nabha chāī | mānahum̐ maghā-megha jhari lāī ||
dharu dharu māru suniya dhuni kānā | jo mārai tehi kou na jānā ||

73.3

गहि गिरि तरु अकास कपि धावहिँ । देखहिँ तेहि न दुखित फिरि आवहिँ ॥
अवघट-घाट-बाट--गिरि कन्दर । माया बल कीन्हेसि सर-पंजर ॥

gahi giri taru akāsa kapi dhāvahim̐ | dekhahim̐ tehi na dukhita phiri āvahim̐ ||
avaghaṭa-ghāṭa-bāṭa--giri kandara | māyā bala kīnhesi sara-paṃjara ||

73.4

जाहिँ कहाँ व्याकुल भए बन्दर । सुरपति बन्दि परे जनु मन्दर ॥
मारुतसुत अङ्गद नल नीला । कीन्हेसि बिकल सकल बलसीला ॥

jāhim̐ kahām̐ vyākula bhae bandara | surapati bandi pare janu mandara ||
mārutasuta aṅgada nala nīlā | kīnhesi bikala sakala balasīlā ||

73.5

पुनि लछिमन सुग्रीव बिभीषन । सरन्हि मारि कीन्हेसि जर्जर-तन ॥
पुनि रघुपति सैं जूझे लागा । सर छाँड़इ होइ लागहिँ नागा ॥

puni lachimana sugrīva bibhīṣana | saranhi māri kīnhesi jarjara-tana ||
puni raghupati saiṃ jūjhe lāgā | sara chām̐r̤ai hoi lāgahim̐ nāgā ||

73.6

व्याल-पास-बस भये खरारी । स्वबस अनन्त एक अबिकारी ॥
नट इव कपट चरित कर नाना । सदा स्वतन्त्र राम भगवाना ॥

vyāla-pāsa-basa bhaye kharārī | svabasa ananta eka abikārī ||
naṭa iva kapaṭa carita kara nānā | sadā svatantra rāma bhagavānā ||

73.7

रन सोभा लगि प्रभुहिं बँधायो । नागपास देवन्ह भय पायो ॥

rana sobhā lagi prabhuhiṃ bam̐dhāyo | nāgapāsa devanha bhaya pāyo ||

दो॰ 73दोहा

गिरिजा जासु नाम जपि, मुनि काटहिं भव पास ।
सो कि बन्ध तर आवइ, व्यापक बिस्व-निवास ॥

girijā jāsu nāma japi, muni kāṭahiṃ bhava pāsa |
so ki bandha tara āvai, vyāpaka bisva-nivāsa ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0