महिष खाइ करि मदिरा पाना । गर्जा बज्राघात, समाना ॥
कुम्भकरन दुर्मद रन रङ्गा । चला दुर्ग तजि सेन न सङ्गा ॥
mahiṣa khāi kari madirā pānā | garjā bajrāghāta, samānā ||
kumbhakarana durmada rana raṅgā | calā durga taji sena na saṅgā ||
6 श्लोक · 64 में से 121
कुम्भकर्ण भैंसे खाकर और मदिरा पीकर वज्र की तरह गरजता है और रण के मद में अकेला किले से निकल पड़ता है। विभीषण आगे आकर चरणों में गिरते हैं और अपना नाम बताते हैं। वह उन्हें उठाकर हृदय से लगा लेता है, क्योंकि रघुनाथ के भक्त उसे भाते हैं। विभीषण बताते हैं कि हित की सलाह देने पर रावण ने उन्हें लात मारी, उसी ग्लानि से वे प्रभु के पास आए और प्रभु ने उन्हें अपना लिया। कुम्भकर्ण कहता है: पुत्र, रावण काल के वश है, अब कोई सीख नहीं मानेगा। धन्य हो विभीषण, तुम राक्षस-कुल के भूषण हो; शोभा और सुख के सागर राम को भजकर तुमने वंश उजागर किया। मन, वचन, कर्म से छल छोड़कर उन्हें भजो। अब जाओ, मैं काल के वश हूँ, मुझे अपना-पराया नहीं सूझता।
महिष खाइ करि मदिरा पाना । गर्जा बज्राघात, समाना ॥
कुम्भकरन दुर्मद रन रङ्गा । चला दुर्ग तजि सेन न सङ्गा ॥
mahiṣa khāi kari madirā pānā | garjā bajrāghāta, samānā ||
kumbhakarana durmada rana raṅgā | calā durga taji sena na saṅgā ||
देखि बिभीषन आगें आयउ । परेउ चरन निज नाम सुनायउ ॥
अनुज उठाइ हृदयँ तेहि लायो । रघुपति भगत जानि मन भावा ॥
dekhi bibhīṣana āgeṃ āyau | pareu carana nija nāma sunāyau ||
anuja uṭhāi hṛdayam̐ tehi lāyo | raghupati bhagata jāni mana bhāvā ||
तात लात रावन मोहि मारा । कहत परम-हित मन्त्र-बिचारा ॥
तेहिं गलानि रघुपति पहिँ आयउँ । देखि दीन प्रभु के मन भायउँ ॥
tāta lāta rāvana mohi mārā | kahata parama-hita mantra-bicārā ||
tehiṃ galāni raghupati pahim̐ āyaum̐ | dekhi dīna prabhu ke mana bhāyaum̐ ||
सुनु सुत भयउ कालबस रावन । सो कि मान अब परम सिखावन ॥
धन्य धन्य तें धन्य बिभीषन । भयहु तात निसिचर-कुल-भूषन ॥
sunu suta bhayau kālabasa rāvana | so ki māna aba parama sikhāvana ||
dhanya dhanya teṃ dhanya bibhīṣana | bhayahu tāta nisicara-kula-bhūṣana ||
बन्धु बंस ते कीन्ह उजागर । भजेहु राम सोभा-सुख-सागर ॥
bandhu baṃsa te kīnha ujāgara | bhajehu rāma sobhā-sukha-sāgara ||
बचन करम मन कपट तजि, भजेहु राम रनधीर ।
जाहु न निज पर सूझ मोहि, भयउँ कालबस बीर ॥
bacana karama mana kapaṭa taji, bhajehu rāma ranadhīra |
jāhu na nija para sūjha mohi, bhayaum̐ kālabasa bīra ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0