लंकाकाण्ड

अध्याय 63: कुम्भकर्ण की फटकार और श्रीराम-दर्शन की लालसा

5 श्लोक · 63 में से 121

इस अध्याय में क्या होता है

कुम्भकर्ण की फटकार और श्रीराम-दर्शन की लालसा

कुम्भकर्ण रावण से साफ़ कहता है: निशाचरराज, तूने अच्छा नहीं किया, और अब मुझे जगाने आया है। भाई, अब भी अभिमान छोड़कर राम को भज, तभी कल्याण होगा। जिनके हनुमान जैसे सेवक हैं, क्या वे रघुनाथ साधारण मनुष्य हैं? तूने उस प्रभु से वैर किया है जिनके सेवक शिव, ब्रह्मा और सारे देवता हैं। वह कहता है कि नारद मुनि ने मुझे जो ज्ञान दिया था, वह मैं तुझसे कहता, पर अब समय निकल गया। अब भाई, गले लगकर मिल ले; मैं जाकर श्याम शरीर और कमल-नयन वाले, तीनों तापों को हरने वाले प्रभु को देखूँ और अपने नेत्र सफल करूँ। श्रीराम के रूप और गुणों का स्मरण करते हुए वह क्षण भर उन्हीं में मग्न रहता है। उधर रावण उसके लिए करोड़ों घड़े मदिरा और अनेक भैंसे मँगवाता है।

63.1

भल न कीन्ह तैं निसिचर-नाहा । अब मोहि आइ जगाएहि काहा ॥
अजहूँ तात त्यागि अभिमाना । भजहु राम होइहि कल्याना ॥

bhala na kīnha taiṃ nisicara-nāhā | aba mohi āi jagāehi kāhā ||
ajahūm̐ tāta tyāgi abhimānā | bhajahu rāma hoihi kalyānā ||

63.2

हैं दससीस मनुज रघुनायक । जाके हनूमान से पायक ॥
अहह बन्धु तैं कीन्हि खोटाई । प्रथमहिँ मोहि न सुनाएहि आई ॥

haiṃ dasasīsa manuja raghunāyaka | jāke hanūmāna se pāyaka ||
ahaha bandhu taiṃ kīnhi khoṭāī | prathamahim̐ mohi na sunāehi āī ||

63.3

कीन्हेहु प्रभू बिरोध तेहि देवक । सिव बिरञ्चि सुर जाके सेवक ॥
नारद मुनि मोहि ग्यान जो कहा । कहतेउँ तोहि समय निरबहा ॥

kīnhehu prabhū birodha tehi devaka | siva birañci sura jāke sevaka ||
nārada muni mohi gyāna jo kahā | kahateum̐ tohi samaya nirabahā ||

63.4

अब भरि अङ्क भेंटु मोहि भाई । लोचन सुफल करउँ मैं जाई ॥
स्याम-गात सरसीरुह-लोचन । देखउँ जाइ ताप-त्रय-मोचन ॥

aba bhari aṅka bheṃṭu mohi bhāī | locana suphala karaum̐ maiṃ jāī ||
syāma-gāta sarasīruha-locana | dekhaum̐ jāi tāpa-traya-mocana ||

दो॰ 63दोहा

राम-रूप-गुन सुमिरत, लगन भयउ छन एक ।
रावन मागेउ कोटि घट, मद अरु महिष अनेक ॥

rāma-rūpa-guna sumirata, lagana bhayau chana eka |
rāvana māgeu koṭi ghaṭa, mada aru mahiṣa aneka ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0