नभ चढ़ि बरष बिपुल अंगारा । महि ते प्रगट होहिं जलधारा ॥
नाना भाँति पिसाच पिसाची । मारु काटु धुनि बोलहिँ नाची ॥
nabha car̤hi baraṣa bipula aṃgārā | mahi te pragaṭa hohiṃ jaladhārā ||
nānā bhām̐ti pisāca pisācī | māru kāṭu dhuni bolahim̐ nācī ||
5 श्लोक · 52 में से 121
आकाश में चढ़कर मेघनाद बहुत से अंगारे बरसाता है, और धरती से जल की धाराएँ फूट निकलती हैं। अनेक प्रकार के पिशाच और पिशाचिनियाँ नाचते हुए मारो-काटो की ध्वनि करते हैं। वह विष्ठा, रक्त, हड्डियाँ और पत्थर बरसाता है। फिर धूल बरसाकर ऐसा अंधेरा कर देता है कि अपना पसारा हुआ हाथ भी नहीं सूझता। वानर अकुला जाते हैं। यह कौतुक देखकर राम मुस्कराते हैं, जानते हैं कि सब वानर भयभीत हो गए हैं। एक ही बाण से वे सारी माया काट देते हैं, जैसे सूर्य अंधकार के समूह को हर लेता है। उनकी कृपादृष्टि से वानर फिर प्रबल हो जाते हैं। राम से आज्ञा माँगकर, हाथ में धनुष-बाण लिए, अंगद आदि वानरों के साथ लक्ष्मण क्रोधित होकर चल पड़ते हैं।
नभ चढ़ि बरष बिपुल अंगारा । महि ते प्रगट होहिं जलधारा ॥
नाना भाँति पिसाच पिसाची । मारु काटु धुनि बोलहिँ नाची ॥
nabha car̤hi baraṣa bipula aṃgārā | mahi te pragaṭa hohiṃ jaladhārā ||
nānā bhām̐ti pisāca pisācī | māru kāṭu dhuni bolahim̐ nācī ||
बिष्टा पूय रुधिर कच हाड़ा । बरषइ कबहुँ उपल बहु छाड़ा ॥
बरषि धूरि कीन्हेसि अँधिआरा । सूझ न आपन हाथ पसारा ॥
biṣṭā pūya rudhira kaca hār̤ā | baraṣai kabahum̐ upala bahu chār̤ā ||
baraṣi dhūri kīnhesi am̐dhiārā | sūjha na āpana hātha pasārā ||
कपि अकुलाने माया देखें । सब कर सरन बना एहि लेखें ॥
कौतुक देखि राम मुसुकाने । भए सभीत सकल कपि जाने ॥
kapi akulāne māyā dekheṃ | saba kara sarana banā ehi lekheṃ ||
kautuka dekhi rāma musukāne | bhae sabhīta sakala kapi jāne ||
एक बान काटी सन माया । जिमि दिनकर हर तिमिर-निकाया ॥
कृपादृष्टि कपि भालु बिलोके । भये प्रबल रन रहहिं न रोके ॥
eka bāna kāṭī sana māyā | jimi dinakara hara timira-nikāyā ||
kṛpādṛṣṭi kapi bhālu biloke | bhaye prabala rana rahahiṃ na roke ||
आयसु माँगि राम पहिँ, अङ्गदादि कपि साथ ।
लछिमन चले क्रुद्ध होइ, बान-सरासन हाथ ॥
āyasu mām̐gi rāma pahim̐, aṅgadādi kapi sātha |
lachimana cale kruddha hoi, bāna-sarāsana hātha ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0