लंकाकाण्ड

अध्याय 51: मेघनाद राम को अपनी माया दिखाता है

5 श्लोक · 51 में से 121

इस अध्याय में क्या होता है

मेघनाद राम को अपनी माया दिखाता है

सेना को व्याकुल देखकर पवनपुत्र ऐसे दौड़ते हैं मानो क्रोधित काल हो। वे एक विशाल पर्वत मेघनाद पर फेंकते हैं। उसे आता देख मेघनाद आकाश में चला जाता है, उसके रथ, सारथी और घोड़े सब नष्ट हो जाते हैं। हनुमान ललकारते हैं, पर वह पास नहीं आता। मेघनाद रघुपति के निकट जाकर अनेक प्रकार के कटु वचन कहता है। वह अस्त्र-शस्त्र और सब आयुध चलाता है, और प्रभु खेल ही खेल में उन्हें काटकर हटा देते हैं। प्रभु का प्रताप देखकर वह मूर्ख खिसिया जाता है और अनेक प्रकार की माया करने लगता है, जैसे कोई छोटा-सा सपोला हाथ में लेकर गरुड़ को डराए। दोहा कहता है: जिनकी प्रबल माया के वश शिव और ब्रह्मा सहित बड़े-छोटे सब हैं, उन्हें खोटी बुद्धि वाला राक्षस अपनी माया दिखाता है।

51.1

देखि पवन-सुत कटक बिहाला । क्रोधवन्त जनु धायउ काला ॥
महा-खेल एक तुरत उपारा । अति रिस मेघनाद पर डारा ॥

dekhi pavana-suta kaṭaka bihālā | krodhavanta janu dhāyau kālā ||
mahā-khela eka turata upārā | ati risa meghanāda para ḍārā ||

51.2

आवत देखि गयउ नभ सोई । रथ सारथी तुरग सब खोई ॥
बार बार पचार हनुमाना । निकट न आव मरम से जाना ॥

āvata dekhi gayau nabha soī | ratha sārathī turaga saba khoī ||
bāra bāra pacāra hanumānā | nikaṭa na āva marama se jānā ||

51.3

रघुपति निकट गयउ घननादा । नाना भाँति कहेसि दुर्वादा ॥
अस्त्र सस्त्र आयुध सब डारे । कौतुकहीं प्रभु काटि निवारे ॥

raghupati nikaṭa gayau ghananādā | nānā bhām̐ti kahesi durvādā ||
astra sastra āyudha saba ḍāre | kautukahīṃ prabhu kāṭi nivāre ||

51.4

देखि प्रताप मूढ़ खिसिआना । करइ लाग माया बिधि नाना ॥
जिमि कोउ करइ गरुड़ से खेला । डरपावै गहि स्वल्प सपेला ॥

dekhi pratāpa mūr̤ha khisiānā | karai lāga māyā bidhi nānā ||
jimi kou karai garur̤a se khelā | ḍarapāvai gahi svalpa sapelā ||

दो॰ 51दोहा

जासु प्रबल-माया-बस, सिव-बिरञ्चि बड़ छोट ।
ताहि दिखावइ निसिचर, निज-माया-मति खोट ॥

jāsu prabala-māyā-basa, siva-birañci bar̤a choṭa |
tāhi dikhāvai nisicara, nija-māyā-mati khoṭa ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0