महा महा मुखिआ जे पावहिं । ते पद गहि प्रभु पास चलावहिं ॥
कहइ बिभीषन तिन्ह के नामा । देहिँ राम तिन्हहूँ निज धामा ॥
mahā mahā mukhiā je pāvahiṃ | te pada gahi prabhu pāsa calāvahiṃ ||
kahai bibhīṣana tinha ke nāmā | dehim̐ rāma tinhahūm̐ nija dhāmā ||
5 श्लोक · 45 में से 121
जो बड़े-बड़े मुखिया हाथ लगते हैं, उन्हें दोनों पैर पकड़कर प्रभु की ओर फेंक देते हैं। विभीषण उनके नाम बताते हैं और राम उन्हें भी अपना धाम दे देते हैं। ब्राह्मणों तक का मांस खाने वाले दुष्ट नरभक्षी वह गति पाते हैं जिसे योगी माँगते हैं। शिव उमा से कहते हैं: राम कोमलचित्त और करुणा की खान हैं; राक्षस वैरभाव से ही सही, मेरा स्मरण करते हैं, यह मन में जानकर वे उन्हें परम गति देते हैं। भवानी, कहो, ऐसा कृपालु और कौन है? यह सुनकर भी जो उन्हें नहीं भजते, वे परम अभागे हैं। लंका में दोनों वानर ऐसे शोभित हैं मानो दो मन्दराचल समुद्र मथ रहे हों। दिन ढलता देख दोनों बिना थके कूदकर भगवान के पास आ जाते हैं।
महा महा मुखिआ जे पावहिं । ते पद गहि प्रभु पास चलावहिं ॥
कहइ बिभीषन तिन्ह के नामा । देहिँ राम तिन्हहूँ निज धामा ॥
mahā mahā mukhiā je pāvahiṃ | te pada gahi prabhu pāsa calāvahiṃ ||
kahai bibhīṣana tinha ke nāmā | dehim̐ rāma tinhahūm̐ nija dhāmā ||
खल मनुजाद द्विजामिष-भोगी । पावहिं गति जो जाचत जोगी ॥
उमा राम मृदुचित करुनाकर । बैर-भाव सुमिरत मोहि निसिचर ॥
khala manujāda dvijāmiṣa-bhogī | pāvahiṃ gati jo jācata jogī ||
umā rāma mṛducita karunākara | baira-bhāva sumirata mohi nisicara ||
देहिँ परम-गति सो जियँ जानी । अस कृपालु को कहहु भवानी ॥
अस प्रभु सुनि न भजहिँ भ्रम त्यागी । नर मति-मन्द ते परम अभागी ॥
dehim̐ parama-gati so jiyam̐ jānī | asa kṛpālu ko kahahu bhavānī ||
asa prabhu suni na bhajahim̐ bhrama tyāgī | nara mati-manda te parama abhāgī ||
अङ्गद अरु हनुमन्त प्रबेसा । कीन्ह दुर्ग अस कह अवधेसा ॥
लंकाँ दोउ कपि सोहहिं कैसें । मथहि सिन्धु दुइ मन्दर जैसें ॥
aṅgada aru hanumanta prabesā | kīnha durga asa kaha avadhesā ||
laṃkām̐ dou kapi sohahiṃ kaiseṃ | mathahi sindhu dui mandara jaiseṃ ||
भुज बल रिपु-दल दलमलि, देखि दिवस कर अन्त ।
कूदे जुगल बिगत-श्रम, आये जहँ भगवन्त ॥
bhuja bala ripu-dala dalamali, dekhi divasa kara anta |
kūde jugala bigata-śrama, āye jaham̐ bhagavanta ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0