लंकाकाण्ड

अध्याय 42: रावण भागती सेना को लौटाता है

6 श्लोक · 42 में से 121

इस अध्याय में क्या होता है

रावण भागती सेना को लौटाता है

राम के प्रताप से प्रबल वानर राक्षसों को मसलकर गढ़ पर चढ़ जाते हैं। राक्षसों के झुण्ड ऐसे भागते हैं जैसे प्रबल पवन से बादल। नगर में भारी हाहाकार होता है, बालक रोते हैं, स्त्रियाँ व्याकुल हैं। सब मिलकर रावण को कोसते हैं कि इसने राज करते हुए मृत्यु को बुला लिया। अपनी सेना के भागने की बात सुनकर लंकेश क्रोधित होकर योद्धाओं को लौटाता है: जिसे मैं रण से पीठ फेरकर लौटा जानूँगा, उसे अपनी भयानक तलवार से मारूँगा। मेरा सब कुछ खाकर, नाना भोग भोगकर, अब रणभूमि में प्राण प्यारे हो गए? वीर लज्जित होकर लौटे। सामने लड़कर मरना धीर का शोभा है, यह सोचकर उन्होंने प्राणों का लोभ छोड़ दिया और भालू-वानरों को व्याकुल कर दिया।

42.1

राम-प्रताप-प्रबल कपि-जूथा । मर्दहिँ निसिचर-निकर-बरूथा ॥
चढ़े दुर्ग पुनि जहँ तहँ बानर । जय रघुबीर प्रताप-दिवाकर ॥

rāma-pratāpa-prabala kapi-jūthā | mardahim̐ nisicara-nikara-barūthā ||
car̤he durga puni jaham̐ taham̐ bānara | jaya raghubīra pratāpa-divākara ||

42.2

चले निसाचर-निकर पराई । प्रबल पवन जिमि घन समुदाई ॥
हाहाकार भयउ पुर भारी । रोवहिँ बालक आतुर नारी ॥

cale nisācara-nikara parāī | prabala pavana jimi ghana samudāī ||
hāhākāra bhayau pura bhārī | rovahim̐ bālaka ātura nārī ||

42.3

सब मिलि देहिँ रावनहि मारी । राज करत एहिं मृत्यु हँकारी ॥
निज दल बिचल सुनी तेहिं काना । फेरि सुभट लंकेस रिसाना ॥

saba mili dehim̐ rāvanahi mārī | rāja karata ehiṃ mṛtyu ham̐kārī ||
nija dala bicala sunī tehiṃ kānā | pheri subhaṭa laṃkesa risānā ||

42.4

जो रन-बिमुख फिरा मैं जाना । सो मैं हतब कराल कृपाना ॥
सरबस खाइ भोग करि नाना । समर-भूमि भये बल्लभ प्राना ॥

jo rana-bimukha phirā maiṃ jānā | so maiṃ hataba karāla kṛpānā ||
sarabasa khāi bhoga kari nānā | samara-bhūmi bhaye ballabha prānā ||

42.5

उग्र बचन सुनि सकल डेराने । फिरे क्रोध करि बीर लजाने ॥
सनमुख मरन धीर के सोभा । तब तिन्ह तजा प्रान कर लोभा ॥

ugra bacana suni sakala ḍerāne | phire krodha kari bīra lajāne ||
sanamukha marana dhīra ke sobhā | taba tinha tajā prāna kara lobhā ||

दो॰ 42दोहा

बहु-आयुध-धर सुभट सब, भिरहिं पचारि पचारि ।
व्याकुल कीन्हे भालु-कपि, परिघ त्रिसूलन्हि मारि ॥

bahu-āyudha-dhara subhaṭa saba, bhirahiṃ pacāri pacāri |
vyākula kīnhe bhālu-kapi, parigha trisūlanhi māri ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0