लंकाकाण्ड

अध्याय 40: रावण राक्षसों को परकोटे पर भेजता है

6 श्लोक · 40 में से 121

इस अध्याय में क्या होता है

रावण राक्षसों को परकोटे पर भेजता है

लंका में भारी कोलाहल होता है। रावण हँसता है: बन्दरों की ढिठाई तो देखो। काल के प्रेरे बन्दर आ गए हैं और मेरे राक्षस भूखे हैं; विधाता ने घर बैठे भोजन भेज दिया। चारों दिशाओं में जाओ और भालू-वानरों को पकड़-पकड़कर खा जाओ। शिव उमा से कहते हैं कि रावण का अभिमान टिटिहरी जैसा है, जो पैर ऊपर करके सोती है। राक्षस साँग, तोमर, मुद्गर, फरसे, त्रिशूल, तलवार, परिघ और पर्वत-खण्ड लेकर चल पड़ते हैं। जैसे लाल पत्थरों के ढेर पर मांसाहारी पक्षी झपटते हैं और चोंच टूटने का दुख नहीं सूझता, वैसे ही ये नासमझ नरभक्षी दौड़ते हैं। करोड़ों रणधीर राक्षस परकोटे के कँगूरों पर चढ़ जाते हैं।

40.1

लंकाँ भयउ कोलाहल भारी । सुना दसानन अति अहँकारी ॥
देखहु बनरन्ह केरि ढिठाई । बिहँसि निसाचर सेन बोलाई ॥

laṃkām̐ bhayau kolāhala bhārī | sunā dasānana ati aham̐kārī ||
dekhahu banaranha keri ḍhiṭhāī | biham̐si nisācara sena bolāī ||

40.2

आये कीस काल के प्रेरे । छुधावन्त सब निसिचर मेरे ॥
अस कहि अट्टहास सठ कीन्हा । गृह बैठे अहार बिधि दीन्हा ॥

āye kīsa kāla ke prere | chudhāvanta saba nisicara mere ||
asa kahi aṭṭahāsa saṭha kīnhā | gṛha baiṭhe ahāra bidhi dīnhā ||

40.3

सुभट सकल चारिहुँ दिसि जाहू । धरि धरि भालु कीस सब खाहू ॥
उमा रावनहि अस अभिमाना । जिमि टिट्टिभ-खग सूत उताना ॥

subhaṭa sakala cārihum̐ disi jāhū | dhari dhari bhālu kīsa saba khāhū ||
umā rāvanahi asa abhimānā | jimi ṭiṭṭibha-khaga sūta utānā ||

40.4

चले निसाचर आयसु मागी । गहि कर भिंडिपाल बर साँगी ॥
तोमर मुग्दर परसु प्रचंडा । सूल कृपान परिघ गिरिखंडा ॥

cale nisācara āyasu māgī | gahi kara bhiṃḍipāla bara sām̐gī ||
tomara mugdara parasu pracaṃḍā | sūla kṛpāna parigha girikhaṃḍā ||

40.5

जिमि अरुनोपल निकर निहारी । धावहिँ सठ खग मांस-अहारी ॥
चोंच-अङ्ग-दुख तिन्हहिं न सूझा । तिमि धाये मनुजाद अबूझा ॥

jimi arunopala nikara nihārī | dhāvahim̐ saṭha khaga māṃsa-ahārī ||
coṃca-aṅga-dukha tinhahiṃ na sūjhā | timi dhāye manujāda abūjhā ||

दो॰ 40दोहा

नानायुध सर चाप धर, जातुधान-बल बीर ।
कोट कँगूरन्हि चढ़ि गये, कोटि कोटि रनधीर ॥

nānāyudha sara cāpa dhara, jātudhāna-bala bīra |
koṭa kam̐gūranhi car̤hi gaye, koṭi koṭi ranadhīra ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0