लंकाकाण्ड

अध्याय 39: चार दल लंका को घेरने चले

6 श्लोक · 39 में से 121

इस अध्याय में क्या होता है

चार दल लंका को घेरने चले

शत्रु का समाचार पाकर राम मंत्रियों को बुलाते हैं: लंका के चार बाँके द्वार हैं, विचारो कि आक्रमण कैसे हो। सुग्रीव, जाम्बवान और विभीषण सूर्यकुलभूषण का स्मरण कर दृढ़ मन्त्र ठहराते हैं और वानर सेना के चार दल बनाकर यथायोग्य सेनापति नियुक्त करते हैं। यूथपतियों को प्रभु का प्रताप समझाते हैं। सुनकर वानर सिंहनाद करके दौड़ते हैं, राम के चरणों में सिर नवाकर पर्वत-शिखर उठा लेते हैं। भालू-वानर गरजते हैं: कोसलपति रघुवीर की जय! लंका को दुर्गम जानते हुए भी प्रभु के प्रताप से वे निडर होकर घटा की तरह चारों ओर से घेर लेते हैं और मुँह से ही नगाड़े बजाते हैं। जय राम, जय लक्ष्मण, जय सुग्रीव की गर्जना होती है।

39.1

रिपु के समाचार जब पाये । राम सचिव सब निकट बोलाये ॥
लङ्का बाँके चारि दुआरा । केहि विधि लागिअ करहु बिचारा ॥

ripu ke samācāra jaba pāye | rāma saciva saba nikaṭa bolāye ||
laṅkā bām̐ke cāri duārā | kehi vidhi lāgia karahu bicārā ||

39.2

तब कपीस रिच्छेस बिभीषन । सुमिरि-हृदयँ दिनकर-कुल-भूषन ॥
करि विचार तिन्ह मन्त्र दृढ़ावा । चारि अनी कपि-कटक बनावा ॥

taba kapīsa ricchesa bibhīṣana | sumiri-hṛdayam̐ dinakara-kula-bhūṣana ||
kari vicāra tinha mantra dṛr̤hāvā | cāri anī kapi-kaṭaka banāvā ||

39.3

जथाजोग सेनापति कीन्हे । जूथप सकल बोलि तम लीन्हे ॥
प्रभु प्रताप कहि सब समुझाये । सुनि कपि सिंघनाद करि धाये ॥

jathājoga senāpati kīnhe | jūthapa sakala boli tama līnhe ||
prabhu pratāpa kahi saba samujhāye | suni kapi siṃghanāda kari dhāye ||

39.4

हरषित राम-चरन सिर नावहिं । गहि-गिरि-सिखर बीर सब धावहिं ॥
गर्जहिँ तर्जहिँ भालु कपीसा । जय रघुबीर कोसलाधीसा ॥

haraṣita rāma-carana sira nāvahiṃ | gahi-giri-sikhara bīra saba dhāvahiṃ ||
garjahim̐ tarjahim̐ bhālu kapīsā | jaya raghubīra kosalādhīsā ||

39.5

जानत परम दुर्ग अति लङ्का । प्रभु प्रताप कपि चले असङ्का ॥
घटाटोप करि चहुँ दिसि घेरी । मुखहिं निसान बजावहिँ भेरी ॥

jānata parama durga ati laṅkā | prabhu pratāpa kapi cale asaṅkā ||
ghaṭāṭopa kari cahum̐ disi gherī | mukhahiṃ nisāna bajāvahim̐ bherī ||

दो॰ 39दोहा

जयति राम जय लछिमन, जय कपीस सुग्रीव ।
गर्जहिँ सिंघनाद कपि, भालु महा बल सीँव ॥

jayati rāma jaya lachimana, jaya kapīsa sugrīva |
garjahim̐ siṃghanāda kapi, bhālu mahā bala sīm̐va ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0