अध्याय 36: मंदोदरी रावण को राम के कर्म याद दिलाती है
8 श्लोक · 36 में से 121
इस अध्याय में क्या होता है
मंदोदरी रावण को राम के कर्म याद दिलाती है
मंदोदरी कहती है: कन्त, कुबुद्धि छोड़िए, रघुपति से युद्ध आपको शोभा नहीं देता। लक्ष्मण की खींची छोटी-सी रेखा भी आप न लाँघ सके। जिसके दूत ने खेल में समुद्र लाँघा, वन उजाड़ा, आपके देखते अक्षयकुमार को मारा और नगर जला दिया, उसे आप जीतेंगे? रघुपति को राजा मात्र न मानिए, वे चराचर के स्वामी हैं। मारीच उनके बाण का प्रताप जानता था, आपने उसकी न मानी। जनक की सभा में धनुष तोड़कर उन्होंने जानकी को ब्याहा, तब आपने उन्हें क्यों न जीता? इन्द्रपुत्र उनका बल जानता है। आपने शूर्पणखा की गति देखी। उन्होंने विराध, खर-दूषण और कबन्ध को मारा, और बालि को एक ही बाण से।