जेहिं जलनाथ बँधायउ हेला । उतरे सेन समेत सुबेला ॥
कारुनीक दिनकर-कूल-केतू । दूत पठायउ तव हित हेतू ॥
jehiṃ jalanātha bam̐dhāyau helā | utare sena sameta subelā ||
kārunīka dinakara-kūla-ketū | dūta paṭhāyau tava hita hetū ||
5 श्लोक · 37 में से 121
मंदोदरी कहती है: जिसने समुद्र बँधवाकर सुवेल पर डेरा डाला, उस करुणामय सूर्यकुलकेतु ने आपके हित के लिए दूत भेजा, और उस दूत ने भरी सभा में आपका बल वैसे मथ दिया जैसे हाथियों में सिंह। जिनके सेवक अंगद और हनुमान हैं, उन्हें आप मद में बहकर मनुष्य कहते हैं। हाय कन्त, आपने राम से विरोध कर लिया। काल डंडा लेकर नहीं मारता, वह धर्म, बल, बुद्धि और विचार हर लेता है; जिसका काल निकट होता है उसे आप जैसा भ्रम होता है। दो पुत्र मारे गए, नगर जल गया, प्रिय, अब भी बस कीजिए। कृपासिन्धु रघुनाथ को भजकर निर्मल यश लीजिए।
जेहिं जलनाथ बँधायउ हेला । उतरे सेन समेत सुबेला ॥
कारुनीक दिनकर-कूल-केतू । दूत पठायउ तव हित हेतू ॥
jehiṃ jalanātha bam̐dhāyau helā | utare sena sameta subelā ||
kārunīka dinakara-kūla-ketū | dūta paṭhāyau tava hita hetū ||
सभा माँझ जेहिं तव बल मथा । करि-बरूथ-महुँ मृगपति जथा ॥
अङ्गद हनुमत अनुचर जाके । रन बाँकुरे बीर अति-बाँके ॥
sabhā mām̐jha jehiṃ tava bala mathā | kari-barūtha-mahum̐ mṛgapati jathā ||
aṅgada hanumata anucara jāke | rana bām̐kure bīra ati-bām̐ke ||
तेहि कहँ पिय पुनि पुनि नर कहहू । सुधा मान ममता मद बहहू ॥
अहह कन्त कृत राम बिरोधा । काल बिबस मन उपज न बोधा ॥
tehi kaham̐ piya puni puni nara kahahū | sudhā māna mamatā mada bahahū ||
ahaha kanta kṛta rāma birodhā | kāla bibasa mana upaja na bodhā ||
काल दंड गहि काहु न मारा । हरइ धर्म बल बुद्धि बिचारा ॥
निकट काल जेहि आवत साँई । तेहि भ्रम होइ तुम्हारिहि नाँई ॥
kāla daṃḍa gahi kāhu na mārā | harai dharma bala buddhi bicārā ||
nikaṭa kāla jehi āvata sām̐ī | tehi bhrama hoi tumhārihi nām̐ī ||
दुइ सुत मरे दहेउ पुर, अजहुँ पूर पिय देहु ।
कृपासिन्धु रघुनाथ भजि, नाथ बिमल जस लेहु ॥
dui suta mare daheu pura, ajahum̐ pūra piya dehu |
kṛpāsindhu raghunātha bhaji, nātha bimala jasa lehu ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0