इस अध्याय में क्या होता है रावण का आदेश और अंगद की फटकार रावण आज्ञा देता है: जहाँ भालू-वानर मिलें खा जाओ, धरती को बन्दरों से खाली कर दो, और दोनों तपस्वी भाइयों को जीवित पकड़ लो। अंगद क्रोध से कहते हैं: गाल बजाते लाज नहीं आती? हे निर्लज्ज कुलघाती, गला काटकर मर जा। रे स्त्री-चोर, कुमार्गी, कामी मूर्ख, तू सन्निपात के रोगी की तरह बकता है; हे नरभक्षी, तू काल के वश है। इसका फल भालू-वानरों के थप्पड़ खाकर पाएगा, तेरी जीभ सिरों सहित रणभूमि में गिरेगी। जिसने एक बाण से बालि को मारा, वह मनुष्य कैसे? बीस आँखें होकर भी तू अंधा है। राम के बाण तेरे रक्त के प्यासे हैं; उसी डर से तुझे छोड़ता हूँ।
33.1 एहि बिधि बेगि सूभट सब धावहु । खाहु भालु कपि जहँ जहँ पावहु ॥ मरकट-हीन करहु महि जाई । जियत धरहु तापस दोउ भाई ॥
ehi bidhi begi sūbhaṭa saba dhāvahu | khāhu bhālu kapi jaham̐ jaham̐ pāvahu || marakaṭa-hīna karahu mahi jāī | jiyata dharahu tāpasa dou bhāī ||
33.2 पुनि सकोप बोलेउ जुबराजा । गाल बजावत तोहि न लाजा ॥ मरु गर काटि निलज कुलघाती । बल बिलोकि बिहरति नहिँ छाती ॥
puni sakopa boleu jubarājā | gāla bajāvata tohi na lājā || maru gara kāṭi nilaja kulaghātī | bala biloki biharati nahim̐ chātī ||
33.3 रे त्रिय-चोर कुमारग-गामी । खल मल-रासि मन्द-मति कामी ॥ सन्यपात जल्पसि दुर्बादा । भएसि कालबस खल मनुजादा ॥
re triya-cora kumāraga-gāmī | khala mala-rāsi manda-mati kāmī || sanyapāta jalpasi durbādā | bhaesi kālabasa khala manujādā ||
33.4 याको फल पावहिगो आगें । बानर भालु-चपेटन्हि लागें ॥ राम-मनुज बोलत असि बानी । गिरहिं न तव रसना अभिमानी ॥
yāko phala pāvahigo āgeṃ | bānara bhālu-capeṭanhi lāgeṃ || rāma-manuja bolata asi bānī | girahiṃ na tava rasanā abhimānī ||
33.5 गिरिहहिं रसना संसय नाहीं । सिरन्हि समेत समर सहि माहीं ॥
girihahiṃ rasanā saṃsaya nāhīṃ | siranhi sameta samara sahi māhīṃ ||
33.सो॰ 33 (क) सोरठा सो नर क्यों दसकंध, बालि बध्यो जेहिं एक सर । बीसहुँ लोचन अन्ध, धिग तब जनम कुजाति जड़ ॥
so nara kyoṃ dasakaṃdha, bāli badhyo jehiṃ eka sara | bīsahum̐ locana andha, dhiga taba janama kujāti jar̤a ||
दो॰ 33 (ख) दोहा तब सोनित की प्यास, तृषित राम सायक-निकर । तजउँ तोहि तेहि त्रास, कटु जल्पक निसिचर अधम ॥
taba sonita kī pyāsa, tṛṣita rāma sāyaka-nikara | tajaum̐ tohi tehi trāsa, kaṭu jalpaka nisicara adhama ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0
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