इहाँ प्रात जागे रघुराई । पूछा मत सब सचिव बोलाई ॥
कहहु बेगि का करिय उपाई । जामवन्त कह पद सिर नाई ॥
ihām̐ prāta jāge raghurāī | pūchā mata saba saciva bolāī ||
kahahu begi kā kariya upāī | jāmavanta kaha pada sira nāī ||
6 श्लोक · 17 में से 121
सबेरे रघुनाथ मंत्रियों को बुलाकर पूछते हैं कि क्या उपाय किया जाए। जाम्बवान चरणों में सिर नवाकर कहते हैं: आप सर्वज्ञ हैं, सबके हृदय में बसते हैं, फिर भी अपनी मति से कहता हूँ, बालिकुमार को दूत बनाकर भेजिए। सबको यह सलाह अच्छी लगती है। प्रभु अंगद से कहते हैं: हे बालिपुत्र, बुद्धि और बल के धाम, मेरे काम से लंका जाओ। मैं जानता हूँ तुम परम चतुर हो। शत्रु से ऐसी बात करना जिससे हमारा काम हो और उसका भी हित हो। आज्ञा सिर धरकर अंगद उठते हैं। मन में सोचते हैं कि राम जिस पर कृपा करें वही गुणसागर हो जाता है; प्रभु के काम तो स्वयं सिद्ध हैं, उन्होंने मुझे केवल आदर दिया है। उनका शरीर पुलकित है।
इहाँ प्रात जागे रघुराई । पूछा मत सब सचिव बोलाई ॥
कहहु बेगि का करिय उपाई । जामवन्त कह पद सिर नाई ॥
ihām̐ prāta jāge raghurāī | pūchā mata saba saciva bolāī ||
kahahu begi kā kariya upāī | jāmavanta kaha pada sira nāī ||
सुनु सर्वज्ञ-सकल-उर-बासी । बुधि बल तेज धरम गुन रासी ॥
मन्त्र कहउँ निज-मति अनुसारा । दूत पठाइअ बालिकुमारा ॥
sunu sarvajña-sakala-ura-bāsī | budhi bala teja dharama guna rāsī ||
mantra kahaum̐ nija-mati anusārā | dūta paṭhāia bālikumārā ||
नीक मंत्र सब के मन माना । अङ्गद सन कह कृपानिधाना ॥
बालि-तनय बुधि बल गुन धामा । लङ्का जाहु तात मम कामा ॥
nīka maṃtra saba ke mana mānā | aṅgada sana kaha kṛpānidhānā ||
bāli-tanaya budhi bala guna dhāmā | laṅkā jāhu tāta mama kāmā ||
बहुत बुझाइ तुम्हहिँ का कहऊँ । परम-चतुर मैं जानत अहऊँ ॥
काज हमार तासु हित होई । रिपु सन करेहु बतकही सोई ॥
bahuta bujhāi tumhahim̐ kā kahaūm̐ | parama-catura maiṃ jānata ahaūm̐ ||
kāja hamāra tāsu hita hoī | ripu sana karehu batakahī soī ||
प्रभु अज्ञा धरि लोस, चरन बन्दि अङ्गद उठेउ ।
सोइ गुन-सागर-ईस, राम कृपा जा पर करहु ॥
prabhu ajñā dhari losa, carana bandi aṅgada uṭheu |
soi guna-sāgara-īsa, rāma kṛpā jā para karahu ||
स्वयं-सिद्ध सब काज नाथ मोहि आदर दियउ ।
अस बिचारि जुबराज, तनु पुलकित हरषित हिये ॥
svayaṃ-siddha saba kāja nātha mohi ādara diyau |
asa bicāri jubarāja, tanu pulakita haraṣita hiye ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0