पुनि प्रभु बोलि लियउ हनुमाना । लङ्का जाहु कहेउ भगवाना ॥
समाचार जानकिहि सुनावहु । तासु कुसल लै तुम्ह चलि आवहु ॥
puni prabhu boli liyau hanumānā | laṅkā jāhu kaheu bhagavānā ||
samācāra jānakihi sunāvahu | tāsu kusala lai tumha cali āvahu ||
6 श्लोक · 107 में से 121
प्रभु हनुमान को लंका भेजते हैं कि जानकी को समाचार सुनाकर उनका कुशल ले आएँ। निशाचरियाँ उनका आदर करके उन्हें सीता के पास ले जाती हैं। हनुमान दूर से प्रणाम करते हैं और जानकी उन्हें रघुपति का दूत पहचान लेती हैं। वे पूछती हैं: प्रभु भाई और सेना सहित कुशल से हैं? हनुमान कहते हैं: माता, सब कुशल है, प्रभु ने रावण को जीत लिया और विभीषण को अचल राज्य मिला। सीता की आँखें सजल हो जाती हैं। वे कहती हैं: तुम्हें क्या दूँ? तीनों लोकों में तुम्हारी इस वाणी के समान कुछ नहीं। हनुमान कहते हैं: माता, प्रभु को विजयी और कुशल देखकर आज मैंने सारा जगत पा लिया। सीता आशीष देती हैं: तुम्हारे हृदय में सब सद्गुण बसें और कोसलपति सदा तुम पर अनुकूल रहें।
पुनि प्रभु बोलि लियउ हनुमाना । लङ्का जाहु कहेउ भगवाना ॥
समाचार जानकिहि सुनावहु । तासु कुसल लै तुम्ह चलि आवहु ॥
puni prabhu boli liyau hanumānā | laṅkā jāhu kaheu bhagavānā ||
samācāra jānakihi sunāvahu | tāsu kusala lai tumha cali āvahu ||
तब हनुमन्त नगर महँ आये । सुनि निसिचरी निसाचर धाये ॥
बहु प्रकार तिन्ह पूजा कीन्ही । जनकसुता देखाइ पुनि दीन्ही ॥
taba hanumanta nagara maham̐ āye | suni nisicarī nisācara dhāye ||
bahu prakāra tinha pūjā kīnhī | janakasutā dekhāi puni dīnhī ||
दूरहि ते प्रनाम कपि कीन्हा । रघुपति दूत जानकीं चीन्हा ॥
कहहु तात प्रभु कृपा निकेता । कुसल अनुज-कपि-सेन समेता ॥
dūrahi te pranāma kapi kīnhā | raghupati dūta jānakīṃ cīnhā ||
kahahu tāta prabhu kṛpā niketā | kusala anuja-kapi-sena sametā ||
सब विधि कुसल कोसलाधीसा । मातु समर जीत्यो दससीसा ॥
अबिचल राज बिभीषन पायो । सुनि कपि बचन हरष उर छायो ॥
saba vidhi kusala kosalādhīsā | mātu samara jītyo dasasīsā ||
abicala rāja bibhīṣana pāyo | suni kapi bacana haraṣa ura chāyo ||
अति हरष-मन तन पुलक लोचन, सजल कह पुनि पुनि रमा ।
का देउँ तोहि त्रेलोक महँ कपि किमपि नहिँ बानी समा ॥
सुनु मातु मैं पायउँ अखिल जग, राज आजु न संसयं ।
रन जीति रिपु दल-बन्धु-जुत-पस्यामि राममनामयं ॥
ati haraṣa-mana tana pulaka locana, sajala kaha puni puni ramā |
kā deum̐ tohi treloka maham̐ kapi kimapi nahim̐ bānī samā ||
sunu mātu maiṃ pāyaum̐ akhila jaga, rāja āju na saṃsayaṃ |
rana jīti ripu dala-bandhu-juta-pasyāmi rāmamanāmayaṃ ||
सुनु सुत सदगुन सकल तव, हृदयँ बसहु हनुमन्त ।
सानुकूल कोसलपति, रहहुँ समेत अनन्त ॥
sunu suta sadaguna sakala tava, hṛdayam̐ basahu hanumanta |
sānukūla kosalapati, rahahum̐ sameta ananta ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0