सैल बिसाल आनि कपि देहीं । कन्दुक इव नल नील ते लेहीं ॥
देखि सेतु अति सुन्दर रचना । बिहसि कृपानिधि बोले बचना ॥
saila bisāla āni kapi dehīṃ | kanduka iva nala nīla te lehīṃ ||
dekhi setu ati sundara racanā | bihasi kṛpānidhi bole bacanā ||
5 श्लोक · 2 में से 121
वानर विशाल पर्वत देते हैं और नल-नील उन्हें गेंद की तरह पकड़ लेते हैं। सेतु की सुन्दर रचना देखकर कृपानिधि श्रीराम मुस्कराकर कहते हैं कि यह भूमि परम रमणीय है, इसकी महिमा कही नहीं जा सकती; यहाँ मैं शम्भु की स्थापना करूँगा, यही मेरे हृदय का बड़ा संकल्प है। सुग्रीव दूत भेजकर सब श्रेष्ठ मुनियों को बुलवा लेते हैं। श्रीराम शिवलिंग स्थापित करके विधिपूर्वक पूजा करते हैं और कहते हैं कि शिव के समान मुझे दूसरा कोई प्रिय नहीं। जो शिवद्रोही होकर मेरा भक्त कहलाता है, वह मुझे सपने में भी नहीं भाता; जो शंकर से विमुख होकर मेरी भक्ति चाहता है, वह मूढ़ नरकगामी है। दोहा कहता है कि ऐसे द्रोही कल्प भर घोर नरक में रहते हैं।
सैल बिसाल आनि कपि देहीं । कन्दुक इव नल नील ते लेहीं ॥
देखि सेतु अति सुन्दर रचना । बिहसि कृपानिधि बोले बचना ॥
saila bisāla āni kapi dehīṃ | kanduka iva nala nīla te lehīṃ ||
dekhi setu ati sundara racanā | bihasi kṛpānidhi bole bacanā ||
परम-रम्य उत्तम यह धरनी । महिमा अमित जाइ नहिँ बरनी ॥
करिहउँ इहाँ संभु थापना । मोरे हृदयँ परम-कलपना ॥
parama-ramya uttama yaha dharanī | mahimā amita jāi nahim̐ baranī ||
karihaum̐ ihām̐ saṃbhu thāpanā | more hṛdayam̐ parama-kalapanā ||
सुनि कपीस बहु दूत पठाये । मुनिबर सकल बोलि लेइ आये ॥
लिङ्ग थापि विधिवत करि पूजा । सिव समान प्रिय मोहि न दूजा ॥
suni kapīsa bahu dūta paṭhāye | munibara sakala boli lei āye ||
liṅga thāpi vidhivata kari pūjā | siva samāna priya mohi na dūjā ||
सिव-द्रोही मम भगत कहावा । सो नर सपनेहुँ मोहि न भावा ॥
सङ्कर-विमुख भगति चह मोरी । सो नारकी मूढ़ मति थोरी ॥
siva-drohī mama bhagata kahāvā | so nara sapanehum̐ mohi na bhāvā ||
saṅkara-vimukha bhagati caha morī | so nārakī mūr̤ha mati thorī ||
सङ्कर प्रिय मम द्रोही, सिव द्रोही मम दास ।
ते नर करहिं कलप भरि, धोर नरक महँ बास ॥
saṅkara priya mama drohī, siva drohī mama dāsa |
te nara karahiṃ kalapa bhari, dhora naraka maham̐ bāsa ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0