नाथ बालि अरु मैं दोउ भाई । प्रीति रही कछु बरनि न जाई ॥
मय-सुत मायाबी तेहि नाऊँ । आवा सो प्रभु हमरें गाऊँ ॥
nātha bāli aru maiṃ dou bhāī | prīti rahī kachu barani na jāī ||
maya-suta māyābī tehi nāūm̐ | āvā so prabhu hamareṃ gāūm̐ ||
8 श्लोक · 6 में से 30
सुग्रीव अपनी कथा कहते हैं। बालि और मैं ऐसे भाई थे जिनकी प्रीति कही नहीं जाती। आधी रात को मायावी दानव द्वार पर ललकारकर गुफा में जा घुसा, बालि और मैं पीछे गए। बालि ने कहा, पखवाड़े भर राह देखना, फिर मुझे मरा जानना। मैं महीने भर रहा, तब गुफा से रक्त की भारी धारा निकली। बालि को मरा समझकर मैं शिला अड़ाकर भाग आया। मन्त्रियों ने बलपूर्वक मुझे राज्य दे दिया। बालि लौटा, मुझे शत्रु मानकर बहुत मारा और मेरा सर्वस्व तथा मेरी स्त्री छीन ली। मैं डर से सब लोकों में भटका; शापवश वह यहाँ नहीं आता। श्रीराम की भुजाएँ फड़क उठती हैं और वे प्रतिज्ञा करते हैं कि एक ही बाण से बालि को मारूँगा, ब्रह्मा और रुद्र की शरण भी उसे न बचा सकेगी।
नाथ बालि अरु मैं दोउ भाई । प्रीति रही कछु बरनि न जाई ॥
मय-सुत मायाबी तेहि नाऊँ । आवा सो प्रभु हमरें गाऊँ ॥
nātha bāli aru maiṃ dou bhāī | prīti rahī kachu barani na jāī ||
maya-suta māyābī tehi nāūm̐ | āvā so prabhu hamareṃ gāūm̐ ||
अर्ध राति पुर-द्वार पुकारा । बाली रिपु-बल सहै न पारा ॥
धावा बालि देखि सो भागा । मैं पुनि गयउँ बन्धु सँग लागा ॥
ardha rāti pura-dvāra pukārā | bālī ripu-bala sahai na pārā ||
dhāvā bāli dekhi so bhāgā | maiṃ puni gayaum̐ bandhu sam̐ga lāgā ||
गिरिबर-गुहाँ पैठ सो जाई । तब बालीं मोहि कहा बुझाई ॥
परिखेसु मोहि एक पखवारा । नहिं आवउँ तब जानेसु मारा ॥
giribara-guhām̐ paiṭha so jāī | taba bālīṃ mohi kahā bujhāī ||
parikhesu mohi eka pakhavārā | nahiṃ āvaum̐ taba jānesu mārā ||
मास दिवस तहँ रहेउँ खरारी । निसरी रुधिर धार तहँ भारी ॥
बालि हतेसि मोहि मारिहि आई । सिला देइ तहँ चलेउँ पराई ॥
māsa divasa taham̐ raheum̐ kharārī | nisarī rudhira dhāra taham̐ bhārī ||
bāli hatesi mohi mārihi āī | silā dei taham̐ caleum̐ parāī ||
मन्त्रिन्ह पुर देखा बिनु साईं । दीन्हेउ मोहि राज बरिआई ॥
बाली ताहि मारि गृह आवा । देखि मोहि जियँ भेद बढ़ावा ॥
mantrinha pura dekhā binu sāīṃ | dīnheu mohi rāja bariāī ||
bālī tāhi māri gṛha āvā | dekhi mohi jiyam̐ bheda bar̤hāvā ||
रिपु सम मोहि मारेसि अति भारी । हरि लीन्हेसि सर्वस अरु नारी ॥
ता के भय रघुबीर कृपाला । सकल भुवन मैं फिरेउँ बिहाला ॥
ripu sama mohi māresi ati bhārī | hari līnhesi sarvasa aru nārī ||
tā ke bhaya raghubīra kṛpālā | sakala bhuvana maiṃ phireum̐ bihālā ||
इहाँ साप बस आवत नाहीँ । तदपि सभीत रहउँ मन माहीं ॥
सुनि सेवक दुख दीनदयाला । फरकि उठीं द्वै भुजा बिसाला ॥
ihām̐ sāpa basa āvata nāhīm̐ | tadapi sabhīta rahaum̐ mana māhīṃ ||
suni sevaka dukha dīnadayālā | pharaki uṭhīṃ dvai bhujā bisālā ||
सुनु सुग्रीव मारिहउँ, बालिहि एकहिं बान ।
ब्रह्म-रुद्र सरनागत, गये न उबरिहिं प्रान ॥
sunu sugrīva mārihaum̐, bālihi ekahiṃ bāna |
brahma-rudra saranāgata, gaye na ubarihiṃ prāna ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0