किष्किन्धाकाण्ड

अध्याय 5: सीता का वस्त्र और सुग्रीव का वचन

5 श्लोक · 5 में से 30

इस अध्याय में क्या होता है

सीता का वस्त्र और सुग्रीव का वचन

मित्रता में बीच में कुछ नहीं रखा जाता, और लक्ष्मण श्रीराम का सारा चरित सुना देते हैं। सुग्रीव आँखों में आँसू भरकर कहते हैं, नाथ, मिथिलेशकुमारी अवश्य मिलेंगी। एक बार मैं मन्त्रियों के साथ यहाँ बैठा था, तब उन्हें आकाश-मार्ग से जाते देखा। वे पराए वश में पड़ी विलाप कर रही थीं और राम राम हा राम पुकार रही थीं। हमें देखकर उन्होंने एक वस्त्र गिरा दिया। श्रीराम तुरन्त उसे माँगते हैं और हृदय से लगाकर बहुत शोक करते हैं। सुग्रीव धीरज बँधाते हैं: हे रघुवीर, शोक छोड़िए और मन में धैर्य लाइए; मैं हर प्रकार से सेवा करूँगा जिससे जानकी आ मिलें। मित्र के वचन सुनकर कृपासिन्धु प्रसन्न होते हैं और पूछते हैं, सुग्रीव, तुम वन में क्यों रहते हो?

5.1

कोन्हि प्रीति कछु बीच न राखा । लछिमन राम चरित सब भाखा ॥
कह सुग्रीव नयन भरि बारी । मिलिहि नाथ मिथिलेसकुमारी ॥

konhi prīti kachu bīca na rākhā | lachimana rāma carita saba bhākhā ||
kaha sugrīva nayana bhari bārī | milihi nātha mithilesakumārī ||

5.2

मन्त्रिन्ह सहित इहाँ एक बारा । बैठ रहेउँ मैं करत बिचारा ॥
गगन-पन्थ देखी मैं जाता । परबस परी बहुत बिलपाता ॥

mantrinha sahita ihām̐ eka bārā | baiṭha raheum̐ maiṃ karata bicārā ||
gagana-pantha dekhī maiṃ jātā | parabasa parī bahuta bilapātā ||

5.3

राम राम हा राम पुकारी । हमहि देखि दीन्हेउ पट डारी ॥
माँगा राम तुरत तेहिं दीन्हा । पट उर लाइ सोच अति कीन्हा ॥

rāma rāma hā rāma pukārī | hamahi dekhi dīnheu paṭa ḍārī ||
mām̐gā rāma turata tehiṃ dīnhā | paṭa ura lāi soca ati kīnhā ||

5.4

कह सुग्रीव सुनहु रघुबीरा । तजहु सोच मन आनहु धीरा ॥
सब प्रकार करिहउँ सेवकाई । जेहि बिधि मिलिहि जानकी आई ॥

kaha sugrīva sunahu raghubīrā | tajahu soca mana ānahu dhīrā ||
saba prakāra karihaum̐ sevakāī | jehi bidhi milihi jānakī āī ||

दो॰ 5दोहा

सखा बचन सुनि हरषे कृपासिधु बलसींव ।
कारन कवन बसहु बन, मोहि कहहु सुग्रीव ॥

sakhā bacana suni haraṣe kṛpāsidhu balasīṃva |
kārana kavana basahu bana, mohi kahahu sugrīva ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0