किष्किन्धाकाण्ड

अध्याय 20: तारा और हनुमान द्वारा लक्ष्मण का शान्त होना

6 श्लोक · 20 में से 30

इस अध्याय में क्या होता है

तारा और हनुमान द्वारा लक्ष्मण का शान्त होना

अंगद लक्ष्मण के चरणों में सिर नवाकर विनती करते हैं और लक्ष्मण उन्हें अभय की बाँह देते हैं। लक्ष्मण का क्रोध सुनकर कपिराज भय से अकुला जाते हैं और कहते हैं, हे हनुमान, तारा को साथ लेकर विनती करके राजकुमार को समझाओ। हनुमान और तारा चरण वन्दना कर, प्रभु का सुयश बखानकर, उन्हें महल में लाते हैं, चरण धोकर पलंग पर बैठाते हैं। तब सुग्रीव चरणों में सिर नवाते हैं और लक्ष्मण उनकी भुजा पकड़कर गले लगाते हैं। सुग्रीव कहते हैं, नाथ, विषय के समान कोई मद नहीं, वह क्षण भर में मुनियों का मन भी मोह लेता है। लक्ष्मण प्रसन्न होकर समझाते हैं और हनुमान दूतों के जाने की बात सुनाते हैं। फिर सुग्रीव हर्षित होकर अंगद आदि के साथ, लक्ष्मण को आगे करके, रघुनाथ के पास आते हैं।

20.1

चरन नाइ सिर बिनती कीन्ही । लछिमन अभय बाँह तेहि दीन्ही ॥
क्रोधवन्त लछिमन सुनि काना । कह कपीस अति भयं अकुलाना ॥

carana nāi sira binatī kīnhī | lachimana abhaya bām̐ha tehi dīnhī ||
krodhavanta lachimana suni kānā | kaha kapīsa ati bhayaṃ akulānā ||

20.2

सुनु हनुमन्त सङ्ग लेइ तारा । करि बिनती समुझाउ कुमारा ॥
तारा सहित जाइ हनुमाना । चरन बन्दि प्रभु सुजस बखाना ॥

sunu hanumanta saṅga lei tārā | kari binatī samujhāu kumārā ||
tārā sahita jāi hanumānā | carana bandi prabhu sujasa bakhānā ||

20.3

करि बिनती मन्दिर लेइ आये । चरन पखारि पलँग बैठाये ॥
तब कपीस चरनन्हि सिर नावा । गहि भुज लछिमन कंठ लगावा ॥

kari binatī mandira lei āye | carana pakhāri palam̐ga baiṭhāye ||
taba kapīsa carananhi sira nāvā | gahi bhuja lachimana kaṃṭha lagāvā ||

20.4

नाथ विषय सम मद कछु नाहीं । मुनि मन मोह करइ छन माहीं ॥
सुनत बिनीत बचन सुख पावा । लछिमन तेहि बहु विधि समुझावा ॥

nātha viṣaya sama mada kachu nāhīṃ | muni mana moha karai chana māhīṃ ||
sunata binīta bacana sukha pāvā | lachimana tehi bahu vidhi samujhāvā ||

20.5

पवन-तनय सब कथा सुनाई । जेहि बिधि गये दूत समुदाई ॥

pavana-tanaya saba kathā sunāī | jehi bidhi gaye dūta samudāī ||

दो॰ 20दोहा

हरषि चले सुग्रीव तब, अङ्गदादि कपि साथ ।
रामानुज आगें करि, आये जहँ रघुनाथ ॥

haraṣi cale sugrīva taba, aṅgadādi kapi sātha |
rāmānuja āgeṃ kari, āye jaham̐ raghunātha ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0