इहाँ पवनसुत हृदयँ बिचारा । राम-काज सुग्रीवँ बिसारा ॥
निकट जाइ चरनन्हि सिरु नावा । चारिहु बिधि तेहि कहि समुझावा ॥
ihām̐ pavanasuta hṛdayam̐ bicārā | rāma-kāja sugrīvam̐ bisārā ||
nikaṭa jāi carananhi siru nāvā | cārihu bidhi tehi kahi samujhāvā ||
5 श्लोक · 19 में से 30
इधर पवनपुत्र मन में विचारते हैं कि सुग्रीव ने राम का काम भुला दिया। वे पास जाकर चरणों में सिर नवाते हैं और साम, दाम, दण्ड, भेद चारों प्रकार से समझाते हैं। सुनकर सुग्रीव बहुत डर जाते हैं: विषयों ने मेरा ज्ञान हर लिया। वे कहते हैं, हे मारुतसुत, दूतों को भेजो कि जहाँ-तहाँ से वानरों के झुण्ड आ जाएँ, और कह दो कि जो पखवाड़े में न आएगा, वह मेरे हाथों मारा जाएगा। हनुमान दूतों को बुलाकर सबका बहुत सम्मान करते हैं और भय, प्रीति तथा नीति दिखाकर भेज देते हैं। इसी समय लक्ष्मण नगर में आते हैं और उनका क्रोध देखकर वानर इधर-उधर भागते हैं। धनुष चढ़ाकर वे कहते हैं कि नगर को जलाकर राख कर दूँगा। नगर को व्याकुल देखकर बालिकुमार अंगद सामने आते हैं।
इहाँ पवनसुत हृदयँ बिचारा । राम-काज सुग्रीवँ बिसारा ॥
निकट जाइ चरनन्हि सिरु नावा । चारिहु बिधि तेहि कहि समुझावा ॥
ihām̐ pavanasuta hṛdayam̐ bicārā | rāma-kāja sugrīvam̐ bisārā ||
nikaṭa jāi carananhi siru nāvā | cārihu bidhi tehi kahi samujhāvā ||
सुनि सुग्रीवँ परम-भय माना । बिषयँ मोर हरि लीन्हेउ ज्ञाना ॥
अब मारुत-सुत दूत समूहा । पठवहु जहँ तहँ बानर-जूहा ॥
suni sugrīvam̐ parama-bhaya mānā | biṣayam̐ mora hari līnheu jñānā ||
aba māruta-suta dūta samūhā | paṭhavahu jaham̐ taham̐ bānara-jūhā ||
कहहु पाख महँ आव न जोई । मोरें कर ता कर बध होई ॥
तब हनुमन्त बोलाये दूता । सब कर करि सनमान बहूता ॥
kahahu pākha maham̐ āva na joī | moreṃ kara tā kara badha hoī ||
taba hanumanta bolāye dūtā | saba kara kari sanamāna bahūtā ||
भय अरु प्रीति नीति देखाई । चले सकल चरनन्हि सिर नाई ॥
एहि अवसर लछिमन पुर आये । क्रोध देखि जहँ तहँ कपि धाये ॥
bhaya aru prīti nīti dekhāī | cale sakala carananhi sira nāī ||
ehi avasara lachimana pura āye | krodha dekhi jaham̐ taham̐ kapi dhāye ||
धनुष चढ़ाइ कहा तब, जारि करउँ पुर छार ।
व्याकुल नगर देखि तब, आयउ बालिकुमार ॥
dhanuṣa car̤hāi kahā taba, jāri karaum̐ pura chāra |
vyākula nagara dekhi taba, āyau bālikumāra ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0