कोसलेस दसरथ के जाये । हम पितु बचन मानि धन आये ॥
नाम राम लछिमन दोउ भाई । सङ्ग नारि सुकुमारि सुहाई ॥
kosalesa dasaratha ke jāye | hama pitu bacana māni dhana āye ||
nāma rāma lachimana dou bhāī | saṅga nāri sukumāri suhāī ||
6 श्लोक · 2 में से 30
श्रीराम सीधा उत्तर देते हैं। हम कोसलराज दशरथ के पुत्र हैं, पिता का वचन मानकर वन आए हैं। मैं राम हूँ, यह लक्ष्मण है, और साथ में एक सुकुमारी राजकुमारी थी। किसी राक्षस ने वैदेही को हर लिया है, हम उन्हें खोज रहे हैं। अब हे विप्र, अपनी कथा कहो। हनुमान स्वामी को पहचानकर चरणों में गिर पड़ते हैं। शिवजी उमा से कहते हैं कि उस सुख का वर्णन नहीं हो सकता; शरीर पुलकित है और मुख से वचन नहीं निकलता। फिर धैर्य धरकर स्तुति और प्रेम-भरा उलाहना: मैंने सेवक की तरह पूछा, पर आप साधारण मनुष्य की तरह क्यों पूछते हैं? आपकी माया से भूला मैं प्रभु को न पहचान सका। एक तो मैं मन्द और कुटिल, ऊपर से प्रभु ने भी मुझे भुला दिया।
कोसलेस दसरथ के जाये । हम पितु बचन मानि धन आये ॥
नाम राम लछिमन दोउ भाई । सङ्ग नारि सुकुमारि सुहाई ॥
kosalesa dasaratha ke jāye | hama pitu bacana māni dhana āye ||
nāma rāma lachimana dou bhāī | saṅga nāri sukumāri suhāī ||
इहाँ हरि निसिचर वैदेही । बिप्र फिरहिँ हम खोजत तेही ॥
आपन चरित कहा हम गाई । कहहु विप्र निज कथा बुझाई ॥
ihām̐ hari nisicara vaidehī | bipra phirahim̐ hama khojata tehī ||
āpana carita kahā hama gāī | kahahu vipra nija kathā bujhāī ||
मनु पहिचानि परेउ गहि चरना । सो सुख उमा नहिँ बरना ॥
पुलकित तन मुख आव न बचना । देखत रुचिर बेष कै रचना ॥
manu pahicāni pareu gahi caranā | so sukha umā nahim̐ baranā ||
pulakita tana mukha āva na bacanā | dekhata rucira beṣa kai racanā ||
पुनि धीरज धरि अस्तुति कीन्ही । हरष हृदयँ निज-नाथहि चीन्ही ॥
मोर न्याउ मैं पूछा साईं । तुम्ह पूछहु कस नर का नाईं ॥
puni dhīraja dhari astuti kīnhī | haraṣa hṛdayam̐ nija-nāthahi cīnhī ||
mora nyāu maiṃ pūchā sāīṃ | tumha pūchahu kasa nara kā nāīṃ ||
तव माया बस फिरउँ भुलाना । तात मैं नहिं प्रभु पहिचाना ॥
tava māyā basa phiraum̐ bhulānā | tāta maiṃ nahiṃ prabhu pahicānā ||
एकु मैं मन्द मोह बस, कुटिल हृदय अज्ञान ।
पुनि प्रभु मोहि बिसारेउ, दीनबन्धु भगवान ॥
eku maiṃ manda moha basa, kuṭila hṛdaya ajñāna |
puni prabhu mohi bisāreu, dīnabandhu bhagavāna ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0