घन घमंड नभ गरजत घोरा । प्रिया हीन डरपत मन मोरा ॥
दामिनि दमक रह न घन माहीँ । खल कै प्रीति जथा थिर नाहीं ॥
ghana ghamaṃḍa nabha garajata ghorā | priyā hīna ḍarapata mana morā ||
dāmini damaka raha na ghana māhīm̐ | khala kai prīti jathā thira nāhīṃ ||
5 श्लोक · 14 में से 30
श्रीराम आगे कहते हैं, और वर्षा का हर दृश्य एक उपदेश बन जाता है। आकाश में बादल घोर गरजते हैं और प्रिया के बिना मेरा मन डरता है। बादल धरती के पास झुककर बरसते हैं, जैसे विद्या पाकर बुद्धिमान नम्र होते हैं। पर्वत बूँदों की चोट ऐसे सहते हैं जैसे सन्त दुष्टों के वचन सहते हैं। छोटी नदियाँ भरकर किनारे तोड़ती हैं, जैसे थोड़े धन से दुष्ट इतराता है। जल सिमटकर तालाबों में भरता है जैसे सज्जन के पास सद्गुण आते हैं, और नदी का जल समुद्र में जाकर अचल हो जाता है, जैसे जीव हरि को पाकर। घास से भरी धरती पर रास्ता नहीं सूझता, जैसे पाखण्ड के वाद से सद्ग्रन्थ छिप जाते हैं।
घन घमंड नभ गरजत घोरा । प्रिया हीन डरपत मन मोरा ॥
दामिनि दमक रह न घन माहीँ । खल कै प्रीति जथा थिर नाहीं ॥
ghana ghamaṃḍa nabha garajata ghorā | priyā hīna ḍarapata mana morā ||
dāmini damaka raha na ghana māhīm̐ | khala kai prīti jathā thira nāhīṃ ||
बरषहिँ जलद भूमि निअराएँ । जथा नवहिं बुध बिद्या पाये ॥
बुन्द-अघात सहहिं गिरि कैसे । खल के बचन सन्त सह जैसें ॥
baraṣahim̐ jalada bhūmi niarāem̐ | jathā navahiṃ budha bidyā pāye ||
bunda-aghāta sahahiṃ giri kaise | khala ke bacana santa saha jaiseṃ ||
छुद्र-नदीं भरि चलीँ तोराई । जस थोरेहुँ धन खल इतराई ॥
भूमि परत भा ढाबर पानी । जनु जीवहि माया लपटानी ॥
chudra-nadīṃ bhari calīm̐ torāī | jasa thorehum̐ dhana khala itarāī ||
bhūmi parata bhā ḍhābara pānī | janu jīvahi māyā lapaṭānī ||
समिटि समिटि जल भरहिं तलावा । जिमि सदगुन सज्जन पहिँ आवा ॥
सरिता जल जलनिधि महँ जाई । होइ अचल जिमि जिव हरि पाई ॥
samiṭi samiṭi jala bharahiṃ talāvā | jimi sadaguna sajjana pahim̐ āvā ||
saritā jala jalanidhi maham̐ jāī | hoi acala jimi jiva hari pāī ||
हरित भूमि तृन-सङ्कुल, समुझि परहिँ नहिँ पन्थ ।
जिमि पाखंड-बाद से, गुप्त होहिं सदग्रन्थ ॥
harita bhūmi tṛna-saṅkula, samujhi parahim̐ nahim̐ pantha |
jimi pākhaṃḍa-bāda se, gupta hohiṃ sadagrantha ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0