बालकाण्ड

अध्याय 97: उमा का माता को समझाना

6 श्लोक · 97 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

उमा का माता को समझाना

पर्वतराज की पत्नी को दुखी देखकर सब स्त्रियाँ व्याकुल हो गईं। मैना विलाप करती हैं, मैंने नारद का क्या बिगाड़ा था, जिन्होंने मेरा बसता घर उजाड़ा और उमा से बावले वर के लिए तप कराया? उन्हें न मोह है न ममता, न धन, न घर, न स्त्री। दूसरों का घर उजाड़ने वाले को न लाज है न डर, बाँझ प्रसव की पीड़ा क्या जाने? तब भवानी विवेक भरी कोमल वाणी में बोलीं, हे माता, सोच मत करो, विधाता का रचा टलता नहीं। यदि भाग्य में बावला पति लिखा है, तो किसी को दोष क्यों दें? व्यर्थ कलंक मत लो, मेरे ललाट पर जो दुःख सुख लिखा है, जहाँ जाऊँगी वहीं पाऊँगी। स्त्रियाँ रोने लगीं। उसी समय हिमाचल नारद और सप्तर्षियों सहित घर आए।

97.1

नारद कर मैं काह बिगारा । भवन मोर जिन्ह बसत उजारा ॥
अस उपदेस उमहिँ जिन्ह दीन्हा । बौरे बरहि लगि तप कीन्हा ॥

nārada kara maiṃ kāha bigārā | bhavana mora jinha basata ujārā ||
asa upadesa umahim̐ jinha dīnhā | baure barahi lagi tapa kīnhā ||

97.2

साचेहुँ उन्ह के मोह न माया । उदासीन धन धाम न जाया ॥
पर-घर-घालक लाज न भीरा । बाझँ कि जान प्रसव की पीरा ॥

sācehum̐ unha ke moha na māyā | udāsīna dhana dhāma na jāyā ||
para-ghara-ghālaka lāja na bhīrā | bājham̐ ki jāna prasava kī pīrā ||

97.3

जननिहि विकल बिलोकि भवानी । बोली जुत-बिबेक मृदु बानी ॥
अस बिचारि सोचहि मति माता । सो न टरइ जो रचइ विधाता ॥

jananihi vikala biloki bhavānī | bolī juta-bibeka mṛdu bānī ||
asa bicāri socahi mati mātā | so na ṭarai jo racai vidhātā ||

97.4

करम लिखा जौँ बाउर नाहू । तौ कत दोष लगाइअ काहू ॥
तुम्ह सन मिटहिँ कि विधि के अङ्का । मातु व्यर्थ जनि लेहु कलङ्का ॥

karama likhā jaum̐ bāura nāhū | tau kata doṣa lagāia kāhū ||
tumha sana miṭahim̐ ki vidhi ke aṅkā | mātu vyartha jani lehu kalaṅkā ||

97.छं॰ 1छन्द

जनि लेहु मातु कलङ्क करुना,-परिहरहु अवसर नहीँ ।
दुखु सुखु जो लिखा लिलार हमरें, जाब जहँ पाउब तहीँ ॥
सुनि उमा बचन बिनीत कोमल, सकल अबला सोचहीँ ।
बहु भाँति बिधिहि लगाइ दूषन, नयन बारि बिमोचहीं ॥

jani lehu mātu kalaṅka karunā,-pariharahu avasara nahīm̐ |
dukhu sukhu jo likhā lilāra hamareṃ, jāba jaham̐ pāuba tahīm̐ ||
suni umā bacana binīta komala, sakala abalā socahīm̐ |
bahu bhām̐ti bidhihi lagāi dūṣana, nayana bāri bimocahīṃ ||

दो॰ 97दोहा

तेहि अवसर नारद सहित, अरु रिषि-सप्त समेत ।
समाचार सुनि तुहिन-गिरि, गवने तुरत निकेत ॥

tehi avasara nārada sahita, aru riṣi-sapta sameta |
samācāra suni tuhina-giri, gavane turata niketa ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0