बालकाण्ड

अध्याय 96: भयंकर वर देखकर मैना का विलाप

6 श्लोक · 96 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

भयंकर वर देखकर मैना का विलाप

बारात को सुहावने जनवासे दिए गए। मैना ने शुभ आरती सजाई, स्त्रियाँ मंगलगीत गाने लगीं, और वे सोने का थाल लिए हर्ष से हर का परछन करने चलीं। रुद्र का विकट वेश देखकर स्त्रियाँ डरकर घर में भाग आईं। मैना के हृदय में भारी दुःख हुआ। उन्होंने गिरिजा को स्नेह से गोद में बैठाया, नेत्रों में आँसू भर आए। जिस विधाता ने तुम्हें ऐसा रूप दिया, उसने बावला वर कैसे रचा? जो फल कल्पवृक्ष में लगना चाहिए, वह जबरदस्ती बबूल में लग रहा है। मैं तुम्हें लेकर पर्वत से गिर पड़ूँगी, आग में जल जाऊँगी या समुद्र में कूद पड़ूँगी। घर उजड़े, जगत में अपयश हो, पर जीते जी यह विवाह न करूँगी।

96.1

लेइ अगवान बरातहि आये । दिये सबहि जनवास सुहाये ॥
मैनाँ सुभ आरती सँवारी । सङ्ग सुमङ्गल गावहिँ नारी ॥

lei agavāna barātahi āye | diye sabahi janavāsa suhāye ||
mainām̐ subha āratī sam̐vārī | saṅga sumaṅgala gāvahim̐ nārī ||

96.2

कञ्चन थार सोह बर पानी । परिछन चली हरहि हरषानी ॥
बिकट-बेष रुद्रहि जब देखा । अबलन्ह उर भय भयउ बिसेखा ॥

kañcana thāra soha bara pānī | parichana calī harahi haraṣānī ||
bikaṭa-beṣa rudrahi jaba dekhā | abalanha ura bhaya bhayau bisekhā ||

96.3

भागि भवन पैठीं अति त्रासा । गये महेस जहाँ जनवासा ॥
मैना हृदयँ भयउ दुख भारी । लीन्ही बोलि गिरीस-कुमारी ॥

bhāgi bhavana paiṭhīṃ ati trāsā | gaye mahesa jahām̐ janavāsā ||
mainā hṛdayam̐ bhayau dukha bhārī | līnhī boli girīsa-kumārī ||

96.4

अधिक सनेहँ गोद बैठारी । स्याम-सरोज नयन भरे बारी ॥
जेहिं बिधि तुम्हहिँ रूप अस दीन्हा । तेहिं जड़ बर बाउर कस कीन्हा ॥

adhika saneham̐ goda baiṭhārī | syāma-saroja nayana bhare bārī ||
jehiṃ bidhi tumhahim̐ rūpa asa dīnhā | tehiṃ jar̤a bara bāura kasa kīnhā ||

96.छं॰ 1छन्द

कस कीन्ह बर बौराह बिधि जेहिं, तुम्हहिँ सुन्दरता दई ।
जो फल चहिय सुरतरुहिं सो, बरबस बबूरहिं लागई ॥
तुम्ह सहित गिरि तेँ गिरौं पावक, जरौं जलनिधि महँ परौँ ।
घर जाउ अपजस होउ जग, जीवत बिबाह न हौँ करौँ ॥

kasa kīnha bara baurāha bidhi jehiṃ, tumhahim̐ sundaratā daī |
jo phala cahiya surataruhiṃ so, barabasa babūrahiṃ lāgaī ||
tumha sahita giri tem̐ girauṃ pāvaka, jarauṃ jalanidhi maham̐ paraum̐ |
ghara jāu apajasa hou jaga, jīvata bibāha na haum̐ karaum̐ ||

दो॰ 96दोहा

भई बिकल अबला सकल, दुखित देखि गिरि-नारि ।
करि बिलाप रोदति बदति, सुता सनेह सँभारि ॥

bhaī bikala abalā sakala, dukhita dekhi giri-nāri |
kari bilāpa rodati badati, sutā saneha sam̐bhāri ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0