तब नारद सबही समुझावा । पूरब-कथा-प्रसङ्ग सुनावा ॥
मैना सत्य सुनहु मम बानी । जगदम्बा तव सुता भवानी ॥
taba nārada sabahī samujhāvā | pūraba-kathā-prasaṅga sunāvā ||
mainā satya sunahu mama bānī | jagadambā tava sutā bhavānī ||
6 श्लोक · 98 में से 361
नारद ने सबको पहले की कथा सुनाई। हे मैना, सच सुनो, तुम्हारी पुत्री भवानी जगदम्बा है, अनादि, अविनाशिनी शक्ति और शम्भु की अर्धांगिनी। वह जगत की उत्पत्ति, पालन और संहार करती है। पहले दक्ष के घर सती नाम से जन्मी और शंकर से ब्याही गई। एक बार शिव के साथ लौटते हुए उसने रघुकुल के सूर्य श्रीराम को देखा, मोह हुआ, शिव का कहा न माना और भ्रम में सीता का वेश धरा। इसी अपराध से शंकर ने उसे त्यागा, और वियोग में वह पिता के यज्ञ में योगाग्नि में जली। अब तुम्हारे घर जन्म लेकर उसने अपने पति के लिए कठोर तप किया है। गिरिजा सदा शंकर की प्रिया है, संशय छोड़ो। सबका विषाद मिट गया।
तब नारद सबही समुझावा । पूरब-कथा-प्रसङ्ग सुनावा ॥
मैना सत्य सुनहु मम बानी । जगदम्बा तव सुता भवानी ॥
taba nārada sabahī samujhāvā | pūraba-kathā-prasaṅga sunāvā ||
mainā satya sunahu mama bānī | jagadambā tava sutā bhavānī ||
अजा अनादि-सक्ति अबिनासिनि । सदा सम्भु अरधंग-निवासिनि ॥
जग-सम्भव-पालन-लय कारिनि । निज-इच्छा लीला बपु धारिनि ॥
ajā anādi-sakti abināsini | sadā sambhu aradhaṃga-nivāsini ||
jaga-sambhava-pālana-laya kārini | nija-icchā līlā bapu dhārini ||
जनमीं प्रथम दच्छ-गृह जाई । नाम सती सुन्दर तनु पाई ॥
तहउँ सती सङ्करहि बिबाहीं । कथा प्रसिद्ध सकल जग माहीँ ॥
janamīṃ prathama daccha-gṛha jāī | nāma satī sundara tanu pāī ||
tahaum̐ satī saṅkarahi bibāhīṃ | kathā prasiddha sakala jaga māhīm̐ ||
एक बार आवत सिव सङ्गा । देखेउ रघुकुल कमल पतङ्गा ॥
भयउ मोह सिव कहा न कीन्हा । भ्रम बस बेष सीय कर लीन्हा ॥
eka bāra āvata siva saṅgā | dekheu raghukula kamala pataṅgā ||
bhayau moha siva kahā na kīnhā | bhrama basa beṣa sīya kara līnhā ||
सिय बेष सती जो कीन्ह तेहि, अपराध सङ्कर परिहरीं ।
हर बिरहँ जाइ बहोरि पितु कें, जग्य जोगानल जरीं ॥
अब जनमि तुम्हरे भवन निज पति लागि दारुन तप किया ।
अस जानि संसय तजहु गिरिजा, सर्बदा सङ्कर प्रिया ॥
siya beṣa satī jo kīnha tehi, aparādha saṅkara pariharīṃ |
hara biraham̐ jāi bahori pitu keṃ, jagya jogānala jarīṃ ||
aba janami tumhare bhavana nija pati lāgi dāruna tapa kiyā |
asa jāni saṃsaya tajahu girijā, sarbadā saṅkara priyā ||
सुनि नारद के बचन तब, सब कर मिटा विषाद ।
छन महँ ब्यापेउ सकल पुर, घर घर यह सम्बाद ॥
suni nārada ke bacana taba, saba kara miṭā viṣāda |
chana maham̐ byāpeu sakala pura, ghara ghara yaha sambāda ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0