नगर निकट बरात जब आई । पुर खरभर सोभा अधिकाई ॥
करि बनाव सजि बाहन नाना । चले लेन सादर अगवाना ॥
nagara nikaṭa barāta jaba āī | pura kharabhara sobhā adhikāī ||
kari banāva saji bāhana nānā | cale lena sādara agavānā ||
6 श्लोक · 95 में से 361
बारात नगर के पास आई तो अगवानी करने वाले वाहन सजाकर आदर से लेने चले। देवताओं की सेना और हरि को देखकर वे हर्षित हुए, पर शिव का समाज देखते ही सब वाहन डरकर भाग चले। सयाने लोग धीरज धरकर रहे, बालक प्राण लेकर भागे। घर पहुँचकर वे काँपते हुए माता पिता से बोले, क्या कहें, यह यमराज की सेना है या बारात? दूल्हा बावला है, बैल पर सवार, सर्प, कपाल और राख ही उसके गहने हैं, नंगा और जटाधारी। साथ में भूत, प्रेत, पिशाच, योगिनियाँ और विकट निशाचर हैं। जो बारात देखकर जीवित रहे, वही पुण्यवान है और वही उमा का विवाह देखेगा। महेश का समाज समझकर माता पिता मुसकाए और बालकों को निडर किया।
नगर निकट बरात जब आई । पुर खरभर सोभा अधिकाई ॥
करि बनाव सजि बाहन नाना । चले लेन सादर अगवाना ॥
nagara nikaṭa barāta jaba āī | pura kharabhara sobhā adhikāī ||
kari banāva saji bāhana nānā | cale lena sādara agavānā ||
हियँ हरषे सुर-सेन निहारी । हरिहि देखि अति भये सुखारी ॥
सिव समाज जब देखन लागे । बिड़रि चले बाहन सब भागे ॥
hiyam̐ haraṣe sura-sena nihārī | harihi dekhi ati bhaye sukhārī ||
siva samāja jaba dekhana lāge | bir̤ari cale bāhana saba bhāge ||
धरि धीरज तहँ रहे सयाने । बालक सब लेइ जीव पराने ॥
गये भवन पूछहिँ पितु माता । कहहिँ बचन भय कम्पित गाता ॥
dhari dhīraja taham̐ rahe sayāne | bālaka saba lei jīva parāne ||
gaye bhavana pūchahim̐ pitu mātā | kahahim̐ bacana bhaya kampita gātā ||
कहिय काह कहि जाइ न बाता । जम कर धार किधौँ बरिआता ॥
बर बौराह बरद असवारा । व्याल कपाल बिभूषन छारा ॥
kahiya kāha kahi jāi na bātā | jama kara dhāra kidhaum̐ bariātā ||
bara baurāha barada asavārā | vyāla kapāla bibhūṣana chārā ||
तन छार ब्याल कपाल भूषन, नगन जटिल भयङ्करा ।
सँग भूत प्रेत पिसाच जोगिनि, बिकट-मुख रजनीचरा ॥
जो जियत रहिहि बरात देखत, पुन्य बड़ तेहि कर सही ।
देखिहि सो उमा बिबाह घर घर, बात असि लरिकन्ह कही ॥
tana chāra byāla kapāla bhūṣana, nagana jaṭila bhayaṅkarā |
sam̐ga bhūta preta pisāca jogini, bikaṭa-mukha rajanīcarā ||
jo jiyata rahihi barāta dekhata, punya bar̤a tehi kara sahī |
dekhihi so umā bibāha ghara ghara, bāta asi larikanha kahī ||
समुझि महेस समाज सब, जननि जनक मुसुकाहिँ ।
बाल बुझाये बिबिध विधि, निडर होहु डर नाहिँ ॥
samujhi mahesa samāja saba, janani janaka musukāhim̐ |
bāla bujhāye bibidha vidhi, niḍara hohu ḍara nāhim̐ ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0