बालकाण्ड

अध्याय 91: विवाह का लग्न निश्चित

5 श्लोक · 91 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

विवाह का लग्न निश्चित

ऋषियों ने गिरिराज को सारा प्रसंग सुनाया। कामदहन सुनकर वे बहुत दुखी हुए, फिर रति को वरदान की बात सुनकर बहुत सुख माना। हृदय में शम्भु की प्रभुता विचारकर उन्होंने आदर से श्रेष्ठ मुनियों को बुलाया। शुभ दिन, शुभ नक्षत्र और शुभ घड़ी शोधवाकर वेदविधि से शीघ्र लग्न धराया। हिमाचल ने वह लग्नपत्रिका सप्तर्षियों को दी और उनके चरण पकड़कर विनती की। उन्होंने जाकर वह पत्री ब्रह्मा को दी, जिसे पढ़ते हुए उनके हृदय में प्रेम न समाया। ब्रह्मा ने लग्न पढ़कर सबको सुनाया, सुनकर सारा देवसमाज हर्षित हुआ। आकाश से फूल बरसे, बाजे बजे और दसों दिशाओं में मंगल कलश सजाए गए। सब देवता अपने वाहन और विमान सजाने लगे, सुखद मंगल शकुन होने लगे और अप्सराएँ गाने लगीं।

91.1

सबु प्रसंगु गिरिपतिहि सुनावा । मदन दहन सुनि अति दुख पावा ॥
बहुरि कहेउ रति कर बरदाना । सुनि हिमवन्त बहुत सुख माना ॥

sabu prasaṃgu giripatihi sunāvā | madana dahana suni ati dukha pāvā ||
bahuri kaheu rati kara baradānā | suni himavanta bahuta sukha mānā ||

91.2

हृदयँ बिचारि सम्भु प्रभुताई । सादर मुनिवर लिये बोलाई ॥
सुदिन सुनखत सुघरी सोचाई । बेगि बेद विधि लगन धराई ॥

hṛdayam̐ bicāri sambhu prabhutāī | sādara munivara liye bolāī ||
sudina sunakhata sugharī socāī | begi beda vidhi lagana dharāī ||

91.3

पत्री सप्तरिषिन्ह सोइ दीन्ही । गहि पद विनय हिमाचल कीन्ही ॥
जाइ विधिहि दीन्हि से पाती । बाचत प्रीति न हृदयँ समाती ॥

patrī saptariṣinha soi dīnhī | gahi pada vinaya himācala kīnhī ||
jāi vidhihi dīnhi se pātī | bācata prīti na hṛdayam̐ samātī ||

91.4

लगन बाचि बिधि सबहि सुनाई । हरषे सुनि सब सुर समुदाई ॥
सुमन वृष्टि नभ बाजन बाजे । मङ्गल कलस दसहुँ दिसि साजे ॥

lagana bāci bidhi sabahi sunāī | haraṣe suni saba sura samudāī ||
sumana vṛṣṭi nabha bājana bāje | maṅgala kalasa dasahum̐ disi sāje ||

दो॰ 91दोहा

लगे सँवारन सकल सुर, बाहन बिबिध बिमान ।
होहिँ सगुन मङ्गल सुखद, करहिँ अपछरा गान ॥

lage sam̐vārana sakala sura, bāhana bibidha bimāna |
hohim̐ saguna maṅgala sukhada, karahim̐ apacharā gāna ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0