सिवहि सम्भुगन करहिँ सिँगारा । जटा-मुकुट अहि-मौर सँवारा ॥
कुंडल कङ्कन पहिरे ब्याला । तन-बिभूति पट-केहरि-छाला ॥
sivahi sambhugana karahim̐ sim̐gārā | jaṭā-mukuṭa ahi-maura sam̐vārā ||
kuṃḍala kaṅkana pahire byālā | tana-bibhūti paṭa-kehari-chālā ||
5 श्लोक · 92 में से 361
शम्भु के गण शिव का श्रृंगार करने लगे। जटाओं का मुकुट और उस पर सर्पों का मौर, सर्पों के ही कुण्डल और कंकण, शरीर पर विभूति और कमर पर बाघम्बर। ललाट पर चन्द्रमा, सिर पर गंगा, तीन नेत्र, सर्प का जनेऊ, कण्ठ में विष और छाती पर मुण्डमाला। वेश अमंगल है, पर कृपालु शिव कल्याण के धाम हैं। त्रिशूल और डमरू लिए वे बैल पर चढ़कर चले। देवांगनाएँ मुसकाती हैं कि इस वर के योग्य दुलहिन संसार में नहीं। विष्णु, ब्रह्मा आदि देवता भी बारात में चले। देवसमाज अनुपम था, पर बारात दूल्हे के अनुरूप न थी, तब विष्णु ने हँसकर दिक्पालों से कहा कि सब अपने अपने समाज सहित अलग अलग चलो।
सिवहि सम्भुगन करहिँ सिँगारा । जटा-मुकुट अहि-मौर सँवारा ॥
कुंडल कङ्कन पहिरे ब्याला । तन-बिभूति पट-केहरि-छाला ॥
sivahi sambhugana karahim̐ sim̐gārā | jaṭā-mukuṭa ahi-maura sam̐vārā ||
kuṃḍala kaṅkana pahire byālā | tana-bibhūti paṭa-kehari-chālā ||
ससि ललाट सुन्दर सिर गङ्गा । नयन-तीनि उपबीत-भुजङ्गा ॥
गरल-कंठ उर नर-सिर-माला । असिव-बेष सिव-धाम कृपाला ॥
sasi lalāṭa sundara sira gaṅgā | nayana-tīni upabīta-bhujaṅgā ||
garala-kaṃṭha ura nara-sira-mālā | asiva-beṣa siva-dhāma kṛpālā ||
कर त्रिसूल अरु डमरु बिराजा । चले बसहँ चढ़ि बाजहिँ बाजा ॥
देखि सिवहि सुर-त्रिय मुसुकाहीँ । बर लायक दुलहिनि जग नाहीं ॥
kara trisūla aru ḍamaru birājā | cale basaham̐ car̤hi bājahim̐ bājā ||
dekhi sivahi sura-triya musukāhīm̐ | bara lāyaka dulahini jaga nāhīṃ ||
बिष्नु बिरच्जि आदि सुर ब्राता । चढ़ि चढ़ि बाहन चले बराता ॥
सुर-समाज सब भाँति अनूपा । नहिँ बरात दूलह अनुरूपा ॥
biṣnu biracji ādi sura brātā | car̤hi car̤hi bāhana cale barātā ||
sura-samāja saba bhām̐ti anūpā | nahim̐ barāta dūlaha anurūpā ||
बिष्नु कहा अस बिहँसि तब, बोलि सकल दिसिराज ।
बिलग बिलग होइ चलहु सब, निज निज सहित समाज ॥
biṣnu kahā asa biham̐si taba, boli sakala disirāja |
bilaga bilaga hoi calahu saba, nija nija sahita samāja ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0