सुनि बोलीं मुसकाइ भवानी । उचित कहेउ मुनिबर बिज्ञानी ॥
तुम्हरें जान काम अब जारा । अब लगि सम्भु रहे सबिकारा ॥
suni bolīṃ musakāi bhavānī | ucita kaheu munibara bijñānī ||
tumhareṃ jāna kāma aba jārā | aba lagi sambhu rahe sabikārā ||
5 श्लोक · 90 में से 361
यह सुनकर भवानी मुसकाकर बोलीं, हे विज्ञानी मुनिवरो, आपने उचित ही कहा। आपकी समझ में शम्भु ने अब काम को जलाया है, अब तक वे विकारयुक्त रहे। पर हमारी समझ में शिव सदा से योगी, अजन्मा, अनिन्द्य, निष्काम और भोगरहित हैं। यदि मैंने शिव को ऐसा जानकर मन, वचन और कर्म से प्रेमपूर्वक सेवा की है, तो हे मुनीश्वरो, सुनिए, कृपानिधान ईश्वर मेरा प्रण सत्य करेंगे। आपने जो कहा कि हर ने काम को जला दिया, यह आपका बड़ा अविवेक है। हे तात, अग्नि का सहज स्वभाव है कि पाला उसके पास कभी नहीं जाता, और जाए तो अवश्य नष्ट हो जाता है। महेश के सामने कामदेव की यही दशा है। प्रेम और विश्वास देखकर मुनि हर्षित हुए और भवानी को सिर नवाकर हिमाचल के पास गए।
सुनि बोलीं मुसकाइ भवानी । उचित कहेउ मुनिबर बिज्ञानी ॥
तुम्हरें जान काम अब जारा । अब लगि सम्भु रहे सबिकारा ॥
suni bolīṃ musakāi bhavānī | ucita kaheu munibara bijñānī ||
tumhareṃ jāna kāma aba jārā | aba lagi sambhu rahe sabikārā ||
हमरें जान सदा सिव जोगी । अज अनवद्य अकाम अभोगी ॥
जौँ मैँ सिव सेये अस जानी । प्रीति समेत करम-मन-बानी ॥
hamareṃ jāna sadā siva jogī | aja anavadya akāma abhogī ||
jaum̐ maim̐ siva seye asa jānī | prīti sameta karama-mana-bānī ||
तौ हमार पन सुनहु मुनीसा । करिहहिँ सत्य कृपानिधि ईसा ॥
तुम्ह जो कहा हर जारेउ मारा । सोइ अति बड़ अविबेक तुम्हारा ॥
tau hamāra pana sunahu munīsā | karihahim̐ satya kṛpānidhi īsā ||
tumha jo kahā hara jāreu mārā | soi ati bar̤a avibeka tumhārā ||
तात अनल कर सहज सुभाऊ । हिम तेहि निकट जाइ नहिँ काऊ ॥
गये समीप सो अवसि नसाई । असि मन्मथ महेस कै नाई ॥
tāta anala kara sahaja subhāū | hima tehi nikaṭa jāi nahim̐ kāū ||
gaye samīpa so avasi nasāī | asi manmatha mahesa kai nāī ||
हियँ हरषे मुनि बचन सुनि, देखि प्रीति बिस्वास ।
चले भवानिहि नाइ सिर, गये हिमाचल पास ॥
hiyam̐ haraṣe muni bacana suni, dekhi prīti bisvāsa |
cale bhavānihi nāi sira, gaye himācala pāsa ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0