बालकाण्ड

अध्याय 87: तीसरे नेत्र से कामदहन

6 श्लोक · 87 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

तीसरे नेत्र से कामदहन

आम के एक सुन्दर वृक्ष की डाल देखकर कामदेव क्रोध में उस पर चढ़ गया। धनुष कान तक तानकर बाण छोड़े। विषम बाण हृदय में लगे, समाधि छूट गई और शम्भु जाग उठे। उन्होंने चारों ओर देखा। आम के पत्तों में कामदेव दिखा, उनके क्रोध से तीनों लोक काँप उठे। तब शिव ने तीसरा नेत्र खोला और देखते ही काम जलकर राख हो गया। जगत में भारी हाहाकार हुआ, देवता डरे और असुर सुखी हुए। पति की गति सुनकर रति मूर्छित हो गई, फिर रोती हुई शंकर के पास गई और हाथ जोड़कर विनती की। आशुतोष कृपालु शिव बोले, हे रति, अब से तेरे पति का नाम अनंग होगा, बिना शरीर के वह सबमें व्याप्त रहेगा। अब अपने मिलन की बात सुन।

87.1

देखि रसाल बिटप बर साखा । तेहि पर चढ़ेउ मदन मन माखा ॥
सुमन चाप निज सर सन्धाने । अति रिस ताकि स्रबन लगि ताने ॥

dekhi rasāla biṭapa bara sākhā | tehi para car̤heu madana mana mākhā ||
sumana cāpa nija sara sandhāne | ati risa tāki srabana lagi tāne ||

87.2

छाड़े विषम बान उर लागे । छूटि समाधि सम्भु तब जागे ॥
भयउ ईस मन छोभ बिसेखी । नयन उघारि सकल दिसि देखी ॥

chār̤e viṣama bāna ura lāge | chūṭi samādhi sambhu taba jāge ||
bhayau īsa mana chobha bisekhī | nayana ughāri sakala disi dekhī ||

87.3

सौरभ-पल्लव मदन बिलोका । भयउ कोप कम्पेउ त्रैलोका ॥
तब सिवँ तीसर नयन उघारा । चितवत काम भयउ जरि छारा ॥

saurabha-pallava madana bilokā | bhayau kopa kampeu trailokā ||
taba sivam̐ tīsara nayana ughārā | citavata kāma bhayau jari chārā ||

87.4

हाहाकार भयउ जग भारी । डरपे सुर भये असुर सुखारी ॥
समुझि काम-सुख सोचहिँ भोगी । भये अकंटक साधक जोगी ॥

hāhākāra bhayau jaga bhārī | ḍarape sura bhaye asura sukhārī ||
samujhi kāma-sukha socahim̐ bhogī | bhaye akaṃṭaka sādhaka jogī ||

87.छं॰ 1छन्द

जोगी अकंटक भये पति-गति, सुनत रति मुरछित भई ।
रोदति बदति बहु भाँति करुना, करति सङ्कर पहिँ गई ॥
अति प्रेम करि बिनती बिबिध बिधि, जोरि कर सनमुख रही ।
प्रभु आसुतोष कृपाल सिव, अबला निरखि बोले सही ॥

jogī akaṃṭaka bhaye pati-gati, sunata rati murachita bhaī |
rodati badati bahu bhām̐ti karunā, karati saṅkara pahim̐ gaī ||
ati prema kari binatī bibidha bidhi, jori kara sanamukha rahī |
prabhu āsutoṣa kṛpāla siva, abalā nirakhi bole sahī ||

दो॰ 87दोहा

अब तेँ रति तव नाथ कर, होइहि नाम अनङ्ग ।
बिनु बपु ब्यापिहि सबहि पुनि, सुनु निज मिलन प्रसङ्ग ॥

aba tem̐ rati tava nātha kara, hoihi nāma anaṅga |
binu bapu byāpihi sabahi puni, sunu nija milana prasaṅga ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0