बालकाण्ड

अध्याय 86: वसन्त का प्रभाव और शिव की अटल समाधि

6 श्लोक · 86 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

वसन्त का प्रभाव और शिव की अटल समाधि

जब तक कामदेव शम्भु के पास पहुँचा, तब तक दो घड़ी यह कौतुक रहा। शिव को देखकर काम डर गया और सारा संसार फिर पहले जैसा हो गया। सब जीव तुरन्त ऐसे सुखी हुए जैसे मतवालों का मद उतर गया हो। दुर्धर्ष और दुर्गम भगवान रुद्र को देखकर कामदेव भयभीत हुआ। लौटने में लाज थी, इसलिए मरने का निश्चय करके उसने उपाय रचा। उसने तुरन्त सुन्दर ऋतुराज वसन्त को प्रकट किया। वृक्ष नए फूलों से लद गए, सब दिशाएँ सुहावनी हो गईं। जहाँ तहाँ मानो प्रेम उमड़ रहा था, मरे हुए मन में भी काम जाग उठा। शीतल, सुगन्धित, मन्द पवन चली, पक्षी बोले, अप्सराएँ नाचने लगीं। करोड़ों प्रकार सब कलाएँ करके भी कामदेव सेना सहित हार गया। शिव की अचल समाधि न डिगी, तब काम क्रोधित हुआ।

86.1

उभय घरी अस कौतुक भयऊ । जब लगि काम सम्भु पहिँ गयऊ ॥
सिवहि बिलोकि ससङ्केउ मारू । भयउ जथाथिति सब संसारू ॥

ubhaya gharī asa kautuka bhayaū | jaba lagi kāma sambhu pahim̐ gayaū ||
sivahi biloki sasaṅkeu mārū | bhayau jathāthiti saba saṃsārū ||

86.2

भये तुरत सब जीव सुखारे । जिमि मद उतरि गये मतवारे ॥
रुद्रहि देखि मदन भय माना । दुराधरष दुर्गम भगवाना ॥

bhaye turata saba jīva sukhāre | jimi mada utari gaye matavāre ||
rudrahi dekhi madana bhaya mānā | durādharaṣa durgama bhagavānā ||

86.3

फिरत लाज कछु करि नहिँ जाई । मरन ठानि मन रचेसि उपाई ॥
प्रगटेसि तुरत रुचिर रितुराजा । कुसुमित नव तरु सखा बिराजा ॥

phirata lāja kachu kari nahim̐ jāī | marana ṭhāni mana racesi upāī ||
pragaṭesi turata rucira riturājā | kusumita nava taru sakhā birājā ||

86.4

बन उपबन बापिका तड़ागा । परम सुभग सब दिसा विभागा ॥
जहँ तहँ जनु उमगत अनुरागा । देखि मुएहुँ मन मनसिज जागा ॥

bana upabana bāpikā tar̤āgā | parama subhaga saba disā vibhāgā ||
jaham̐ taham̐ janu umagata anurāgā | dekhi muehum̐ mana manasija jāgā ||

86.छं॰ 1छन्द

जागेउ मनोभव मुएहुँ मन बन, सुभगता न परइ कही ।
सीतल सुगन्ध सुमन्द मारुत, मदन-अनल सखा सही ॥
बिकसे सरन्हि बहु कञ्ज गुञ्जत, पुञ्ज मञ्जुल मधुकरा ।
कलहंस पिक सुक सरस-रव करि, गान नाचहिँ अपछरा ॥

jāgeu manobhava muehum̐ mana bana, subhagatā na parai kahī |
sītala sugandha sumanda māruta, madana-anala sakhā sahī ||
bikase saranhi bahu kañja guñjata, puñja mañjula madhukarā |
kalahaṃsa pika suka sarasa-rava kari, gāna nācahim̐ apacharā ||

दो॰ 86दोहा

सकल कला करि कोटि बिधि, हारेउ सेन समेत ।
चली न अचल समाधि सिव, कोपेउ हृदय निकेत ॥

sakala kalā kari koṭi bidhi, hāreu sena sameta |
calī na acala samādhi siva, kopeu hṛdaya niketa ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0