बालकाण्ड

अध्याय 88: रति को वर, देवताओं की प्रार्थना

5 श्लोक · 88 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

रति को वर, देवताओं की प्रार्थना

शिव ने कहा, जब यदुवंश में श्रीकृष्ण का अवतार होगा, जो पृथ्वी का भारी भार हरेंगे, तब कृष्ण का पुत्र तेरा पति होगा। मेरा वचन अन्यथा नहीं होगा। शंकर की वाणी सुनकर रति चली गई। याज्ञवल्क्य कहते हैं, अब दूसरी कथा विस्तार से कहता हूँ। देवताओं ने यह समाचार पाया, तब ब्रह्मा आदि वैकुण्ठ गए। फिर विष्णु और ब्रह्मा सहित सब देवता वहाँ गए जहाँ कृपा के धाम शिव थे। उन्होंने अलग अलग स्तुति की, चन्द्रशेखर प्रसन्न हुए। कृपासिन्धु वृषकेतु बोले, हे देवताओ, किस कारण आए हो? ब्रह्मा बोले, हे प्रभु, आप अन्तर्यामी हैं, फिर भी भक्ति के वश विनती करता हूँ। हे शंकर, सब देवताओं के हृदय में यही परम उत्साह है कि हे नाथ, अपनी आँखों से आपका विवाह देखें।

88.1

जन जदुबंस कृष्न अवतारा । होइहि हरन महा महि भारा ॥
कृष्न-तनय होइहि पति तोरा । बचन अन्यथा होइ न मोरा ॥

jana jadubaṃsa kṛṣna avatārā | hoihi harana mahā mahi bhārā ||
kṛṣna-tanaya hoihi pati torā | bacana anyathā hoi na morā ||

88.2

रति गवनी सुनि सङ्कर बानी । कथा अपर अब कहउँ बखानी ॥
देवन्ह समाचार सब पाये । ब्रह्मादिक बैकुंठ सिधाये ॥

rati gavanī suni saṅkara bānī | kathā apara aba kahaum̐ bakhānī ||
devanha samācāra saba pāye | brahmādika baikuṃṭha sidhāye ||

88.3

सब सुर बिष्नु बिरञ्चि समेता । गये जहाँ सिव कृपा-निकेता ॥
पृथक पृथक तिन्ह कीन्ह प्रसंसा । भये प्रसन्न चन्द्र-अवतंसा ॥

saba sura biṣnu birañci sametā | gaye jahām̐ siva kṛpā-niketā ||
pṛthaka pṛthaka tinha kīnha prasaṃsā | bhaye prasanna candra-avataṃsā ||

88.4

बोले कृपासिन्धु बृषकेतू । कहहु अमर आयहु केहि हेतू ॥
कह बिधि तुम्ह प्रभु अन्तरजामी । तदपि भगति बस बिनवउँ स्वामी ॥

bole kṛpāsindhu bṛṣaketū | kahahu amara āyahu kehi hetū ||
kaha bidhi tumha prabhu antarajāmī | tadapi bhagati basa binavaum̐ svāmī ||

दो॰ 88दोहा

सकल सुरन्ह के हृदयँ अस, सङ्कर परम उछाह ।
निज नयनन्हि देखा चहहिँ, नाथ तुम्हार बिबाह ॥

sakala suranha ke hṛdayam̐ asa, saṅkara parama uchāha |
nija nayananhi dekhā cahahim̐, nātha tumhāra bibāha ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0