जाइ मुनिन्ह हिमवन्त पठाये । करि बिनती गिरजहिं गृह ल्याये ॥
बहुरि सप्तरिषि सिव पहिं जाई । कथा उमा कै सकल सुनाई ॥
jāi muninha himavanta paṭhāye | kari binatī girajahiṃ gṛha lyāye ||
bahuri saptariṣi siva pahiṃ jāī | kathā umā kai sakala sunāī ||
5 श्लोक · 82 में से 361
हिमवान विनती करके गिरिजा को घर ले आए। फिर सप्तर्षियों ने शिव के पास जाकर उमा की सारी कथा सुनाई। उनका स्नेह सुनकर शिव आनन्द में मग्न हो गए और सप्तर्षि हर्षित होकर अपने घर गए। तब सुजान शम्भु मन स्थिर करके रघुनायक का ध्यान करने लगे। उसी समय तारक नाम का असुर हुआ। उसने सब लोकों और लोकपालों को जीत लिया, देवता सुख और सम्पत्ति से रीते हो गए। वह अजर अमर था, जीता न जाता था, देवता अनेक लड़ाइयाँ लड़कर हार गए। तब उन्होंने ब्रह्मा के पास जाकर पुकार की। ब्रह्मा ने सब देवताओं को दुखी देखकर समझाया कि इस दानव का अन्त तभी होगा जब शम्भु के वीर्य से पुत्र उत्पन्न हो, वही इसे रण में जीतेगा।
जाइ मुनिन्ह हिमवन्त पठाये । करि बिनती गिरजहिं गृह ल्याये ॥
बहुरि सप्तरिषि सिव पहिं जाई । कथा उमा कै सकल सुनाई ॥
jāi muninha himavanta paṭhāye | kari binatī girajahiṃ gṛha lyāye ||
bahuri saptariṣi siva pahiṃ jāī | kathā umā kai sakala sunāī ||
भये मगन सिव सुनत सनेहा । हरषि सप्तरिषि गवने गेहा ॥
मन थिर करि तब सम्भु सुजाना । लगे करन रघुनायक ध्याना ॥
bhaye magana siva sunata sanehā | haraṣi saptariṣi gavane gehā ||
mana thira kari taba sambhu sujānā | lage karana raghunāyaka dhyānā ||
तारक-असुर भयउ तेहि काला । भुज प्रताप बल तेज बिसाला ॥
तेहिँ सब लोक लोकपति-जीते । भये देव सुख-सम्पति रीते ॥
tāraka-asura bhayau tehi kālā | bhuja pratāpa bala teja bisālā ||
tehim̐ saba loka lokapati-jīte | bhaye deva sukha-sampati rīte ||
अजर अमर सो जीति न जाई । हारे सुर करि बिबिध लराई ॥
तब बिरञ्चि सन जाइ पुकारे । देखे बिधि सब देव दुखारे ॥
ajara amara so jīti na jāī | hāre sura kari bibidha larāī ||
taba birañci sana jāi pukāre | dekhe bidhi saba deva dukhāre ||
सब सन कहा बुझाइ बिधि, दनुज निधन तब होइ ।
सम्भु-सुक्र-सम्भूत-सुत, एहि जीतइ रन सोइ ॥
saba sana kahā bujhāi bidhi, danuja nidhana taba hoi |
sambhu-sukra-sambhūta-suta, ehi jītai rana soi ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0