बालकाण्ड

अध्याय 75: सती वियोग के बाद शिव का वैराग्य

5 श्लोक · 75 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

सती वियोग के बाद शिव का वैराग्य

आकाशवाणी आगे कहती है, हे भवानी, धीर और ज्ञानी मुनि अनेक हुए, पर ऐसा तप किसी ने नहीं किया। इस वाणी को सत्य जानकर हृदय में धारण करो। जब पिता बुलाने आएँ, तब हठ छोड़कर घर चली जाना। जब सप्तर्षि तुमसे मिलें, तब इस वाणी को प्रमाणित जानना। आकाश में ब्रह्मा की कही वाणी सुनकर गिरिजा पुलकित होकर हर्षित हुईं। याज्ञवल्क्य कहते हैं, मैंने उमा का सुन्दर चरित गाया, अब शम्भु का सुहावना चरित सुनो। जब से सती ने जाकर शरीर त्यागा, तब से शिव के मन में वैराग्य हो गया। वे सदा रघुनायक का नाम जपते और जहाँ तहाँ रामगुण सुनते। चिदानन्द, सुखधाम, मोह, मद और काम से रहित शिव सब लोकों को आनन्द देने वाले हरि को हृदय में धारण कर पृथ्वी पर विचरते हैं।

75.1

अस तप काहु न कीन्ह भवानी । भये अनेक धीर मुनि ज्ञानी ॥
अब उर धरहु ब्रह्म-बर-बानी । सत्य सदा सन्तत सुचि जानी ॥

asa tapa kāhu na kīnha bhavānī | bhaye aneka dhīra muni jñānī ||
aba ura dharahu brahma-bara-bānī | satya sadā santata suci jānī ||

75.2

आवै पिता बोलावन जबहीं । हठ परिहरि घर जाएहु तबहीं ॥
मिलहिँ तुम्हहिँ जब सप्त-रिषीसा । जानेहु तब प्रमान बागीसा ॥

āvai pitā bolāvana jabahīṃ | haṭha parihari ghara jāehu tabahīṃ ||
milahim̐ tumhahim̐ jaba sapta-riṣīsā | jānehu taba pramāna bāgīsā ||

75.3

सुनत गिरा विधि गगन बखानी । पुलक गात गिरिजा हरषानी ॥
उमा चरित सुन्दर मैं गावा । सुनहु सम्भु कर चरित सुहावा ॥

sunata girā vidhi gagana bakhānī | pulaka gāta girijā haraṣānī ||
umā carita sundara maiṃ gāvā | sunahu sambhu kara carita suhāvā ||

75.4

जब तेँ सती जाइ तनु त्यागा । तब तेँ सिव-मन भयउ बिरागा ॥
जपहिँ सदा रघुनायक-नामा । जहँ तहँ सुनहिँ राम-गुन-ग्रामा ॥

jaba tem̐ satī jāi tanu tyāgā | taba tem̐ siva-mana bhayau birāgā ||
japahim̐ sadā raghunāyaka-nāmā | jaham̐ taham̐ sunahim̐ rāma-guna-grāmā ||

दो॰ 75दोहा

चिदानन्द सुख-धाम सिव, बिगत मोह-मद-काम ।
बिचरहिँ महि धरि हृदयँ हरि, सकल-लोक-अभिराम ॥

cidānanda sukha-dhāma siva, bigata moha-mada-kāma |
bicarahim̐ mahi dhari hṛdayam̐ hari, sakala-loka-abhirāma ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0