बालकाण्ड

अध्याय 74: अपर्णा का तप और आकाशवाणी

5 श्लोक · 74 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

अपर्णा का तप और आकाशवाणी

प्राणपति के चरण हृदय में धरकर उमा वन में जाकर तप करने लगीं। शरीर अत्यन्त कोमल था, तप के योग्य न था, फिर भी पति के चरणों का स्मरण करके उन्होंने सब भोग छोड़ दिए। चरणों में नित्य नया प्रेम उपजता, देह की सुध भूल गई और मन तप में लग गया। एक हजार वर्ष मूल और फल खाए, सौ वर्ष साग खाकर बिताए। कुछ दिन जल और वायु पर रहीं, कुछ दिन कठोर उपवास किए। तीन हजार वर्ष तक भूमि पर गिरे सूखे बेलपत्र खाए, फिर सूखे पत्ते भी छोड़ दिए, तब उमा का नाम अपर्णा हुआ। तप से क्षीण शरीर देखकर आकाश से ब्रह्मा की गम्भीर वाणी हुई, हे गिरिराजकुमारी, तुम्हारा मनोरथ सफल हुआ, अब यह असहनीय क्लेश छोड़ो, त्रिपुरारि तुम्हें मिलेंगे।

74.1

उर धरि उमा प्रान-पति-चरना । जाइ बिपिन लागीँ तप करना ॥
अति सुकुमार न तनु तप जोगू । पति-पद सुमिरि तजेउ सब भोगू ॥

ura dhari umā prāna-pati-caranā | jāi bipina lāgīm̐ tapa karanā ||
ati sukumāra na tanu tapa jogū | pati-pada sumiri tajeu saba bhogū ||

74.2

नित नव चरन उपज अनुरागा । बिसरी देह तपहिं मन लागा ॥
सम्बत सहस मूल फल खाये । साग खाइ सत बरष गवाँए ॥

nita nava carana upaja anurāgā | bisarī deha tapahiṃ mana lāgā ||
sambata sahasa mūla phala khāye | sāga khāi sata baraṣa gavām̐e ||

74.3

कछु दिन भोजन बारि बतासा । किये कठिन कछु दिन उपवासा ॥
बेल-पाती महि परइ सुखाई । तीनि सहस सम्बत सोई खाई ॥

kachu dina bhojana bāri batāsā | kiye kaṭhina kachu dina upavāsā ||
bela-pātī mahi parai sukhāī | tīni sahasa sambata soī khāī ||

74.4

पुनि परिहरे सुखाने सुखाने परना । उमहिँ नाम तब भयउ अपरना ॥
देखि उमहिँ तप-खीन-सरीरा । ब्रह्म-गिरा भइ गगन गँभीरा ॥

puni parihare sukhāne sukhāne paranā | umahim̐ nāma taba bhayau aparanā ||
dekhi umahim̐ tapa-khīna-sarīrā | brahma-girā bhai gagana gam̐bhīrā ||

दो॰ 74दोहा

भयउ मनोरथ सुफल तव, सुनु गिरिराज-कुमारि ।
परिहरु दुसह कलेस सब, अब मिलिहहिँ त्रिपुरारि ॥

bhayau manoratha suphala tava, sunu girirāja-kumāri |
pariharu dusaha kalesa saba, aba milihahim̐ tripurāri ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0