बालकाण्ड

अध्याय 73: तप के लिए उमा का प्रस्थान

5 श्लोक · 73 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

तप के लिए उमा का प्रस्थान

स्वप्न के ब्राह्मण ने कहा था, हे शैलकुमारी, नारद की बात सत्य मानकर जाकर तप करो। तप सुख देने वाला और दुःख दोष का नाश करने वाला है। तप के बल से विधाता सृष्टि रचते हैं, तप के बल से विष्णु जगत की रक्षा करते हैं, तप के बल से शम्भु संहार करते हैं और तप के बल से शेष पृथ्वी का भार धारण करते हैं। हे भवानी, सारी सृष्टि तप पर टिकी है, ऐसा जानकर जाकर तप करो। यह सुनकर माता विस्मित हुईं और गिरिराज को बुलाकर स्वप्न सुनाया। माता पिता को बहुत प्रकार समझाकर उमा हर्ष से तप करने चलीं। परिवार और माता पिता व्याकुल हो गए। तब वेदशिरा मुनि ने आकर सबको समझाया और पार्वती की महिमा सुनकर सबको सान्त्वना मिली।

73.1

करहि जाइ तप सैलकुमारी । नारद कहा सो सत्य बिचारी ॥
मातु-पितहि पुनि यह मत भावा । तप-सुख प्रद दुख-दोष-नसावा ॥

karahi jāi tapa sailakumārī | nārada kahā so satya bicārī ||
mātu-pitahi puni yaha mata bhāvā | tapa-sukha prada dukha-doṣa-nasāvā ||

73.2

तप-बल रचइ प्रपञ्च बिधाता । तप-बल विष्नु सकल-जग-त्राता ॥
तप-अल सम्भु करहिँ सङ्घारा । तप-बल सेष धरहिँ महि भारा ॥

tapa-bala racai prapañca bidhātā | tapa-bala viṣnu sakala-jaga-trātā ||
tapa-ala sambhu karahim̐ saṅghārā | tapa-bala seṣa dharahim̐ mahi bhārā ||

73.3

तप अधार सब सृष्टि भवानी । करहि जाइ तप अस जियँ जानी ॥
सुनत बचन बिसमित महँतारी । सपन सुनायउ गिरिहि हँकारी ॥

tapa adhāra saba sṛṣṭi bhavānī | karahi jāi tapa asa jiyam̐ jānī ||
sunata bacana bisamita maham̐tārī | sapana sunāyau girihi ham̐kārī ||

73.4

मातु-पितहि बहु बिधि समुझाई । चलीँ उमा तप-हित हरषाई ॥
प्रिय परिवार पिता अरु माता । भये विकल मुख आव न बाता ॥

mātu-pitahi bahu bidhi samujhāī | calīm̐ umā tapa-hita haraṣāī ||
priya parivāra pitā aru mātā | bhaye vikala mukha āva na bātā ||

दो॰ 73दोहा

बेदसिरा-मुनि आइ तब, सबहिँ कहा समुझाइ ।
पारबती महिमा सुनत, रहे प्रबोधहि पाइ ॥

bedasirā-muni āi taba, sabahim̐ kahā samujhāi |
pārabatī mahimā sunata, rahe prabodhahi pāi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0