बालकाण्ड

अध्याय 72: माता की गोद और उमा का स्वप्न

5 श्लोक · 72 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

माता की गोद और उमा का स्वप्न

हिमवान बोले, यदि तुम्हें पुत्री पर स्नेह है, तो जाकर उसे ऐसी सीख दो कि वह ऐसा तप करे जिससे महेश मिलें, दूसरे उपाय से यह क्लेश नहीं मिटेगा। नारद के वचन रहस्य से भरे हैं, शंकर सब प्रकार निष्कलंक हैं, शंका छोड़ दो। पति के वचन सुनकर मैना मन में हर्षित हुईं और तुरन्त उठकर गिरिजा के पास गईं। उमा को देखकर उनकी आँखों में आँसू भर आए और उन्होंने स्नेह से उसे गोद में बैठा लिया। बार बार छाती से लगाती थीं, गला भर आया, कुछ कहा न गया। तब जगज्जननी सर्वज्ञ भवानी माता को सुख देने वाली कोमल वाणी में बोलीं, हे माता, मैंने एक स्वप्न देखा है, उसे सुनाती हूँ। एक सुन्दर गोरे श्रेष्ठ ब्राह्मण ने मुझे यह उपदेश दिया है।

72.1

अब जौँ तुम्हहिँ सुता पर नेहू । तो अस जाइ सिखावन देहू ॥
करइ सो तप जेहिं मिलहिँ महेसू । आन उपायँ न मिटिहि कलेसू ॥

aba jaum̐ tumhahim̐ sutā para nehū | to asa jāi sikhāvana dehū ||
karai so tapa jehiṃ milahim̐ mahesū | āna upāyam̐ na miṭihi kalesū ||

72.2

नारद बचन सगर्भ सहेतू । सुन्दर सब-गुन-निधि-बृषकेतू ॥
अस बिचारि तुम्ह तजहु असङ्का । सबहि भाँति सङ्कर अकलङ्का ॥

nārada bacana sagarbha sahetū | sundara saba-guna-nidhi-bṛṣaketū ||
asa bicāri tumha tajahu asaṅkā | sabahi bhām̐ti saṅkara akalaṅkā ||

72.3

सुनि पति-बचन हरषि मन माहीँ । गई तुरत उठि गिरिजा पाहीँ ॥
उमहि बिलोकि नयन भरे बारी । सहित सनेह गोद बैठारी ॥

suni pati-bacana haraṣi mana māhīm̐ | gaī turata uṭhi girijā pāhīm̐ ||
umahi biloki nayana bhare bārī | sahita saneha goda baiṭhārī ||

72.4

बारहिँ बार लेति उर लाई । गदगद कंठ न कछु कहि जाई ॥
जगत-मातु सर्बज्ञ भवानी । मातु-सुखद बोलीं मृदु-बानी ॥

bārahim̐ bāra leti ura lāī | gadagada kaṃṭha na kachu kahi jāī ||
jagata-mātu sarbajña bhavānī | mātu-sukhada bolīṃ mṛdu-bānī ||

दो॰ 72दोहा

सुनहि मातु मैं दीख अस, सपन सुनावउँ तोहि ।
सुन्दर गौर सुबिप्र-बर, अस उपदेसेउ मोहि ॥

sunahi mātu maiṃ dīkha asa, sapana sunāvaum̐ tohi |
sundara gaura subipra-bara, asa upadeseu mohi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0